High BP in Women : महिलाओं के लिए चेतावनी हाई बीपी होने पर शरीर देता है ये 5 संकेत, थकान समझकर न करें अनदेखा
News India Live, Digital Desk: हाई ब्लड प्रेशर अब केवल उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं रही, बल्कि कम उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के कारण महिलाओं में बीपी का स्तर अचानक बढ़ सकता है। समय रहते इन संकेतों को पहचानना जानलेवा स्थिति से बचा सकता है।
1. सिर में भारीपन और तेज दर्द (Frequent Headaches)
अगर आपको अक्सर सिर के पिछले हिस्से में भारीपन या तेज दर्द महसूस होता है, तो यह हाई बीपी का संकेत हो सकता है। यह दर्द आमतौर पर सुबह के समय अधिक होता है।
2. अत्यधिक थकान और कमजोरी (Extreme Fatigue)
बिना किसी भारी काम के भी हर समय थका हुआ महसूस करना हाई बीपी का एक सामान्य लक्षण है। जब रक्त का दबाव अधिक होता है, तो हृदय को पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है।
3. सांस लेने में तकलीफ (Shortness of Breath)
सीढ़ियां चढ़ते समय या थोड़ा चलने पर ही सांस फूलना हाई बीपी (Pulmonary Hypertension) की ओर इशारा करता है। इसे अक्सर महिलाएं वजन बढ़ने या स्टैमिना की कमी मान लेती हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है।
4. आंखों के सामने धुंधलापन (Blurred Vision)
हाई ब्लड प्रेशर आंखों की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को नुकसान पहुँचा सकता है। अगर आपको अचानक धुंधला दिखने लगे या आंखों के सामने अंधेरा छा जाए, तो तुरंत बीपी चेक करवाएं।
5. सीने में दर्द और धड़कन तेज होना (Chest Pain & Palpitations)
अचानक से घबराहट होना या दिल की धड़कन का अनियंत्रित महसूस होना हाई बीपी के गंभीर लक्षण हैं। महिलाओं में यह मेनोपॉज के लक्षणों जैसा लग सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।
महिलाओं में हाई बीपी के मुख्य कारण
हार्मोनल बदलाव: गर्भनिरोधक गोलियों (Contraceptive Pills) का सेवन बीपी बढ़ा सकता है।
गर्भावस्था (Pregnancy): गर्भावस्था के दौरान बीपी बढ़ना (Preeclampsia) मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा होता है।
मेनोपॉज: एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने से धमनियां सख्त होने लगती हैं, जिससे बीपी बढ़ जाता है।
तनाव और अधूरी नींद: घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी के कारण तनाव भी एक बड़ा फैक्टर है।
बचाव के उपाय (Prevention Tips)
नमक कम करें: खाने में नमक की मात्रा सीमित करें (प्रतिदिन 5 ग्राम से कम)।
पोटैशियम बढ़ाएं: केला, पालक और शकरकंद जैसे पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।
सक्रिय रहें: रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या योग करें।
नियमित जांच: 30 की उम्र के बाद महीने में कम से कम एक बार बीपी जरूर मापें।