Health Alert : पैकेज्ड फूड पर बने रंगीन निशानों का क्या है मतलब? पैकेट खोलने से पहले जान लें ये 4 कोडिंग

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News India Live, Digital Desk : भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी डाइट का एक बड़ा हिस्सा 'पैकेट बंद' सामान से पूरा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैकेट के नीचे या पीछे बने छोटे-छोटे रंगीन चौकोर निशान कोई डिजाइन नहीं, बल्कि फूड सेफ्टी के महत्वपूर्ण संकेत हैं? FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के नियमों के अनुसार, ये कोडिंग आपको बताते हैं कि आप जो खा रहे हैं, वह आपके शरीर के लिए कितना सुरक्षित है।

1. लाल, पीला और हरा: 'ट्रैफिक लाइट' कोडिंग

कई देशों की तर्ज पर अब भारत में भी खाद्य पदार्थों पर नमक, चीनी और फैट की मात्रा बताने के लिए कलर कोडिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है:

रंग (Color)मतलब (Meaning)सुझाव (Action)
लाल (Red)इसमें फैट, चीनी या नमक की मात्रा बहुत अधिक है।इसे बहुत कम या कभी-कभी ही खाएं।
नारंगी/पीला (Amber/Yellow)इसमें पोषक तत्वों की मात्रा औसत (Medium) है।इसे सीमित मात्रा में खाया जा सकता है।
हरा (Green)यह सेहत के लिए सुरक्षित और हेल्दी विकल्प है।इसे आप नियमित डाइट में शामिल कर सकते हैं।

2. वेज और नॉन-वेज के नए निशान (Dietary Symbols)

दशकों से हम हरे और भूरे गोले को देख रहे थे, लेकिन अब इनमें बदलाव किया गया है ताकि पहचान और आसान हो:

हरा भरा वर्ग (Green Square): यह शाकाहारी (Vegetarian) भोजन का संकेत है।

भूरा त्रिकोण (Brown Triangle): पहले यह गोल होता था, लेकिन अब मांसाहारी भोजन के लिए 'भूरे त्रिकोण' का उपयोग किया जाता है ताकि दृष्टिबाधित लोग भी छूकर फर्क समझ सकें।

नीला निशान (Blue Symbol): यह अक्सर दूध या डेयरी उत्पादों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

3. 'E' नंबर और एडिटिव्स का खेल

पैकेट के पीछे इंग्रीडिएंट्स लिस्ट में आपने E621 या E102 जैसे कोड देखे होंगे।

ये अंतर्राष्ट्रीय कोडिंग सिस्टम हैं जो फूड कलर, प्रिजर्वेटिव्स (सुरक्षित रखने वाले तत्व) और फ्लेवर बढ़ाने वाले रसायनों को दर्शाते हैं।

टिप: यदि किसी पैकेट पर बहुत ज्यादा 'E' कोड्स हैं, तो समझ लें कि वह भोजन अत्यधिक प्रोसेस्ड (Ultra-processed) है।

4. पैकेट के नीचे बने रंगीन ब्लॉक (CMYK)

अक्सर पैकेट के फोल्ड पर नीले, लाल, पीले और काले रंग के छोटे ब्लॉक बने होते हैं।

सच्चाई: ये खाने की गुणवत्ता नहीं, बल्कि प्रिंटिंग क्वालिटी बताते हैं। इन्हें 'प्रिंटर्स कलर ब्लॉक्स' कहा जाता है। ये सुनिश्चित करते हैं कि पैकेट की छपाई सही रंगों में हुई है।

 खरीदारी करते समय क्या देखें?

फूड सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल 'एक्सपायरी डेट' देखना काफी नहीं है। आपको 'Nutritional Information' टेबल में जाकर यह देखना चाहिए कि प्रति 100 ग्राम में कितनी कैलोरी और कितना 'ट्रांस फैट' है। यदि ट्रांस फैट की मात्रा अधिक है, तो वह आपके दिल के लिए खतरनाक हो सकता है।