Hazaribagh Civil Court Clash : जब कोर्ट कैंपस ही बन गया अखाड़ा ,वकील और दारोगा में मारपीट, 23 लोगों पर FIR, शहर में बवाल

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News India Live, Digital Desk: Hazaribagh Civil Court Clash :  जिस जगह पर इंसाफ की गुहार लगाई जाती है, शुक्रवार को वही जगह जंग का मैदान बन गई। हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में एक वकील और एक पुलिस दारोगा के बीच हुई मामूली कहासुनी ने इतना हिंसक रूप ले लिया कि देखते ही देखते लात-घूंसे चलने लगे। इस घटना के बाद से शहर के वकीलों में जबरदस्त गुस्सा है और पूरे कोर्ट का काम-काज ठप हो गया है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हजारीबाग व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले एक वकील, रंजन कुमार सिंह, किसी काम से कोर्ट परिसर में थे। उसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) कृष्णा कुमार साहू से उनकी किसी बात पर बहस हो गई।

गाली-गलौज से शुरू हुई बात, मारपीट पर खत्म हुई

आरोप है कि दारोगा ने वकील के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच हाथापाई और मारपीट शुरू हो गई। जैसे ही कोर्ट में मौजूद दूसरे वकीलों को इस घटना की जानकारी मिली, वे सब इकट्ठा हो गए। माहौल गरमा गया और कोर्ट कैंपस में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। वकीलों ने इस घटना पर తీవ్ర नाराजगी जताते हुए दारोगा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

दोनों तरफ से FIR, 23 लोग बने आरोपी

मामला अब सड़क से बढ़कर थाने तक पहुंच गया है। इस मारपीट की घटना में दोनों पक्षों की ओर से FIR दर्ज कराई गई है।

  • वकील की तरफ से: वकील रंजन कुमार सिंह ने दारोगा कृष्णा कुमार साहू के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है।
  • पुलिस की तरफ से: वहीं, दारोगा कृष्णा कुमार साहू ने भी वकील रंजन कुमार सिंह, दो अन्य नामजद वकीलों और 20 अज्ञात वकीलों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट करने और वर्दी फाड़ने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है।

"दारोगा सस्पेंड हो, गिरफ्तार हो," वकीलों की मांग

इस घटना के बाद से हजारीबाग के वकील पूरी तरह से आंदोलित हैं। उन्होंने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर दिया ہے, जिससे कोर्ट में कोई काम नहीं हो पा रहा है। उनकी सीधी मांग है कि आरोपी दारोगा कृष्णा कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए और उसे गिरफ्तार किया जाए। वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे।

इस एक घटना ने हजारीबाग में न्याय व्यवस्था पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है और शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता है।