Haryana Orbital Rail Corridor: पलवल से नूंह के बीच बिछेगी डबल रेल लाइन, अरावली को चीरकर निकलेगी ट्रेन; जानें कब तक होगा काम पूरा

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पलवल/नूंह: हरियाणा में बुनियादी ढांचे और रेल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने के लिए भारतीय रेलवे ने कमर कस ली है। देश भर में चल रहे विकास कार्यों की कड़ी में अब हरियाणा के पलवल और नूंह जिलों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। 'हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर' (HORC) प्रोजेक्ट के तहत पलवल के पृथला से लेकर नूंह जिले के धुलावट के बीच नई दोहरी (डबल) रेल लाइन बिछाने के कार्य को हरी झंडी दे दी गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल स्थानीय लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

पृथला बनेगा बड़ा जंक्शन, डीएफसी से होगी सीधी कनेक्टिविटी

हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का निर्माण फरीदाबाद मंडल के पलवल से शुरू होकर सोनीपत तक किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के मास्टर प्लान के अनुसार, पलवल का पृथला स्टेशन एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा। यहां 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' (DFC) और भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिससे यह स्थान दो प्रमुख रेल मार्गों के जंक्शन के रूप में विकसित होगा। इस कनेक्टिविटी से औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा और मालगाड़ियों की गति व क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा होगा।

67 गांवों की जमीन पर 126 किमी लंबा कॉरिडोर

यह रेल कॉरिडोर कुल 126 किलोमीटर से ज्यादा लंबा होगा, जिसके लिए करीब 67 गांवों की 665 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित कर विकास कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक इस मेगा प्रोजेक्ट का लगभग 30 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। रेल लाइन बिछाने के साथ-साथ रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इस कॉरिडोर की खास बात यह है कि इसमें केवल पटरियां ही नहीं बिछाई जा रही हैं, बल्कि आधुनिक रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ जल निकासी के लिए विशेष पुलों और मजबूत रिटेनिंग वॉल का निर्माण भी किया जा रहा है।

अरावली की पहाड़ियों के बीच 5 किमी लंबी सुरंग

इंजीनियरिंग के नजरिए से यह प्रोजेक्ट बेहद चुनौतीपूर्ण और आधुनिक है। नूंह जिले में अरावली की ऊंची पहाड़ियों के बीच से ट्रेन गुजारने के लिए 5 किलोमीटर लंबी एक विशाल सुरंग (टनल) का निर्माण किया जा रहा है। निगम की रिपोर्ट के अनुसार, सुरंग का लगभग 20 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है। इस सुरंग के निर्माण के लिए दुनिया की आधुनिकतम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम को बेजोड़ मजबूती के साथ पूरा किया जा सके।

2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, टेंडर प्रक्रिया शुरू

केंद्रीय गृहमंत्री ने साल 2022 में इस महत्वपूर्ण रेलवे लाइन की आधारशिला रखी थी। निर्माण की कुल अवधि 5 साल तय की गई है, जिसके आधार पर साल 2027 तक इस प्रोजेक्ट को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में पृथला से धुलावट के बीच डबल लाइन बिछाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो अगले दो महीनों के भीतर इस खंड पर काम शुरू हो जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल हरियाणा के परिवहन परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति की नई पटरी भी तैयार करेगा।