देश में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण पाबंदी, उल्लंघन पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
दीपावली और आने वाले प्रमुख त्योहारों से ठीक पहले हरियाणा सरकार ने राज्य में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के बिगड़ने और पर्यावरण में जहरीले स्मॉग के खतरे को देखते हुए एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला सुनाया है। सरकार ने राज्य के सभी 22 जिलों में पारंपरिक पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि किसी भी प्रकार के तेज आवाज और धुएं वाले पटाखों की ऑनलाइन या ऑफलाइन बिक्री करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। दिल्ली-एनसीआर से सटे इलाकों में बिगड़ती हवा की स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने सभी जिला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और स्थानीय निकायों को इस आदेश को तत्काल प्रभाव से जमीन पर लागू कराने के सख्त निर्देश दिए हैं ताकि त्योहार के सीजन में नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो सके।
केवल ग्रीन पटाखों के लिए तय की गई सीमित समयावधि, उल्लंघन करने पर सीधे दर्ज होगी एफआईआर
सरकारी आदेश के अनुसार, राज्य के जिन चुनिंदा क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर बेहतर या मध्यम श्रेणी में है, वहां केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों (Green Crackers) को चलाने की बेहद सीमित छूट दी गई है। इसके लिए भी समय की सख्त पाबंदी तय की गई है, जिसके तहत दीपावली और गुरुपर्व की रात को केवल 2 घंटे (रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक) ही आतिशबाजी की अनुमति होगी। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना लाइसेंस के पटाखों का अवैध स्टॉक जमा करने वाले व्यापारियों, दुकानदारों और नियमों की अनदेखी कर पटाखे जलाने वाले आम नागरिकों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अवैध माल को तुरंत जब्त कर भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिसके लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन की संयुक्त फ्लाइंग स्क्वाड टीमें 24 घंटे गश्त करेंगी।
एनसीआर के जिलों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा प्राथमिकता
हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आता है, जिसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, झज्जर और करनाल जैसे प्रमुख औद्योगिक व शहरी केंद्र शामिल हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही धान की पराली की धुंध, वाहनों के धुएं और मौसमी बदलाव के कारण इन क्षेत्रों की आबोहवा गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पटाखों से निकलने वाले खतरनाक रसायन जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, बेरियम और भारी धातुएं बुजुर्गों, बच्चों तथा सांस व हृदय रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। हरियाणा सरकार ने अपने आदेश में इसी जनस्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को स्वच्छ रखना और नागरिकों की जान बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए जनता को दीपोत्सव को दीयों, रोशनी और मिठाइयों के साथ सुरक्षित व प्रदूषण मुक्त तरीके से मनाना चाहिए।