झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) घोटाले की जांच में मिले भ्रष्टाचार के नए सबूत
झारखंड में बहुचर्चित और प्रतियोगी परीक्षाओं की गरिमा को तार-तार करने वाले झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार की एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली परतें खुलकर सामने आ रही हैं। राज्य की प्रशासनिक और जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ छानबीन के बीच इस मामले में एक ऐसा वित्तीय खुलासा हुआ है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। जांच के दौरान यह बात पुख्ता तौर पर सामने आई है कि आयोग के एक पूर्व सदस्य के निजी सचिव (Personal Assistant - PA) के नाम पर संचालित तीन अलग-अलग बैंक खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इस खुलासे के बाद से राज्य के प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है, क्योंकि यह पैसा सीधे तौर पर परीक्षाओं में धांधली, अभ्यर्थियों के चयन और भाई-भतीजावाद के जरिए अवैध रूप से जुटाए जाने की ओर इशारा कर रहा है।
तीन अलग-अलग बैंक खातों से हुआ एक करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन, वित्तीय जांच एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता
जांच एजेंसियों को छानबीन के दौरान पता चला कि पूर्व आयोग सदस्य के इस बेहद करीबी निजी सचिव ने अपने प्रभाव और पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए भ्रष्टाचार का एक पूरा जाल बुन रखा था। उसके जिन तीन बैंक खातों की डिटेल खंगाली गई है, उनमें पिछले कुछ वर्षों के दौरान अचानक से बड़े पैमाने पर पैसों का आना-जाना दर्ज किया गया है। इन खातों में कई अज्ञात स्रोतों और संदिग्ध शेल कंपनियों के जरिए एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई थी। जब जांच अधिकारियों ने इन खातों के ट्रांजेक्शन का मिलान जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम और इंटरव्यू के समय से किया, तो कई गंभीर और डराने वाले लिंक सामने आए। वित्तीय विशेषज्ञों और फॉरेंसिक ऑडिटर्स की टीम अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर यह काला धन किस-किस परीक्षार्थी या बिचौलिए से वसूला गया था और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े चेहरे पर्दे के पीछे रहकर खेल खेल रहे थे।
परीक्षाओं की सुचिता और मेधावी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले गिरोह पर कसेगा शिकंजा
इस ताजा और सनसनीखेज खुलासे के बाद झारखंड के उन लाखों बेरोजगार और मेहनतकश युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है, जो दिन-रात एक करके सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने मांग की है कि इस घोटाले में संलिप्त केवल छोटे कर्मचारियों या निजी सचिवों तक ही जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि उन तमाम पूर्व सदस्यों, अध्यक्षों और राजनीतिक संरक्षकों के गिरेबान तक हाथ पहुंचा जाए जिनके इशारों पर यह पूरा खेल खेला गया था। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि इन बैंक खातों के डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर जल्द ही कुछ और हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां की जा सकती हैं। जेपीएससी का यह नया घोटाला एक बार फिर यह साबित करता है कि किस तरह से कुछ भ्रष्ट तंत्रों ने सूबे के युवाओं के सपनों का सौदा कर अपनी तिजोरियां भरने का काम किया है, जिस पर अब कानून का हंटर पूरी सख्ती से बरसने की तैयारी में है।