बस्तर ओलंपिक में फूटा युवाओं और महिलाओं का जबर्दस्त उत्साह

बस्तर ओलंपिक में फूटा युवाओं और महिलाओं का जबर्दस्त उत्साह

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की पावन और वीरों की भूमि पर आयोजित हो रहे ऐतिहासिक 'बस्तर ओलंपिक' को लेकर स्थानीय नागरिकों, युवाओं और विशेषकर महिलाओं के भीतर एक अभूतपूर्व और क्रांतिकारी उत्साह देखने को मिल रहा है। कभी हिंसा, नक्सलवाद और भय के साये में पहचाने जाने वाले अंचल में आज खेल, विकास और शांति की नई बयार बह रही है। राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजित इस बहुआयामी खेल महाकुंभ में रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। संभाग के सभी 7 जिलों—बस्तर (जगदलपुर), कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कोंडागांव—से खिलाड़ियों की भारी भागीदारी दर्ज की जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए कुल पंजीयन (Registration) का आंकड़ा 4 लाख के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है, जो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बस्तर का जन-जन अब विकास और खेल संस्कृति की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पूरी तरह आतुर है।

गृह मंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बस्तरवासियों को दी बधाई, कहा- बस्तर अब खेल और शांति का प्रतीक बन रहा है

बस्तर ओलंपिक में 4 लाख के करीब पहुंचे भारी रजिस्ट्रेशन और उसमें महिलाओं व बेटियों की रिकॉर्ड भागीदारी को देखते हुए छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने संभाग की जनता, खिलाड़ियों और प्रशासनिक टीमों को दिल से बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर की माटी में अपार प्रतिभा और ऊर्जा छुपी हुई है, जिसे सही मंच प्रदान करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अंदरूनी और सुदूर वनांचल क्षेत्रों से निकलकर महिलाएं और युवा मैदान में उतर रहे हैं, वह यह साबित करता है कि बुलेट पर बैलेट और स्पोट्र्स की जीत हो रही है। सरकार का उद्देश्य बस्तर के कोने-कोने में छिपी खेल प्रतिभाओं को निखार कर उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंच तक पहुंचाना है ताकि बस्तर की पहचान अब केवल खेलों, संस्कृति और खुशहाली के रूप में दुनिया भर में हो सके।

7 जिलों में पारंपरिक और आधुनिक खेलों का संगम, बस्तर के वनांचल से निकलेंगी नई खेल प्रतिभाएं

बस्तर ओलंपिक का मुख्य आकर्षण केवल आधुनिक खेल ही नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़े पारंपरिक खेल भी हैं। इस भव्य आयोजन में एथलेटिक्स, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और खो-खो जैसी लोकप्रिय स्पर्धाओं के साथ-साथ पारंपरिक खेलों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। सुदूर ग्राम पंचायतों, विकासखंडों से लेकर जिला स्तर तक प्रतियोगिता का ढांचा तैयार किया गया है ताकि गांव का छोटे से छोटा खिलाड़ी भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सके। विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों की भारी संख्या ने यह दिखा दिया है कि बस्तर की बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से न केवल बस्तर में स्थायी शांति और सद्भाव की नींव मजबूत होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर के कई नए और धाकड़ एथलीट भी प्राप्त होंगे।