राजस्थान में लोकतंत्र के पर्व पर चुनावी रंजिश का खौफनाक तांडव

राजस्थान में लोकतंत्र के पर्व पर चुनावी रंजिश का खौफनाक तांडव

लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी चुनावों के दौरान जहां एक तरफ गांव-गांव में विकास और अपने मताधिकार के प्रयोग को लेकर उत्साह का माहौल होना चाहिए, वहीं राजस्थान के ग्रामीण अंचल से एक ऐसी दहला देने वाली और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों के तमाम बंधनों को तार-तार कर दिया है। पंचायतीराज चुनावों की सरगर्मी के बीच एक स्थानीय विवाद ने ऐसा खौफनाक रूप लिया कि एक सगे बेटे ने ही अपने ही मां-बाप को खून से लहूलुहान कर डाला। इस जघन्य वारदात के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय ग्रामीण इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि कोई बेटा चुनावी रंजिश और दोस्तों के दबाव में इतना अंधा कैसे हो सकता है कि वह अपनी ही मां की जान ले ले। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

दोस्त को वोट न देने से खौला कलयुगी बेटे का खून, बुजुर्ग माता-पिता पर बोला कातिलाना हमला

प्राप्त शुरुआती जानकारी और पुलिस की पूछताछ के अनुसार, आरोपी युवक आगामी पंचायतीराज चुनाव में अपने किसी करीबी दोस्त या खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने के लिए पूरे परिवार पर दबाव बना रहा था। लेकिन बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने अपनी मर्जी और विवेक के अनुसार निष्पक्ष होकर मतदान करने की बात कही, जो उस युवक को नागवार गुजरी। चुनावी चर्चा के दौरान बात इतनी बढ़ गई कि आरोपी गुस्से से आगबबूला हो गया और उसने आपा खोते हुए घर में रखे घातक हथियारों से अपने ही माता-पिता पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए। इस अचानक हुए कातिलाना हमले से घर में चीख-पुकार मच गई। गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिरी मां ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि बीच-बचाव करने आए बुजुर्ग पिता गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें खून से लथपथ हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

चुनावी हिंसा और आपसी वैमनस्यता पर उठे गंभीर सवाल, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

इस दर्दनाक हत्याकांड के सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस घटना की कड़ी निंदा कर रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, राजनीतिक और वैचारिक मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन इस तरह की हिंसा और आपराधिक मानसिकता का समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी है कि आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत गंभीर मामला दर्ज कर लिया गया है। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सभी जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि स्थानीय चुनावों की आड़ में किस तरह से आपसी सौहार्द बिगड़ रहा है और रिश्तों की गरिमा खत्म होती जा रही है।