हनुमान जी ने लंका तो जला दी, लेकिन एक घर को आंच भी नहीं आने दी, जानिए वो किसका था?
News India Live, Digital Desk: रामायण का वो दृश्य हम कभी नहीं भूल सकते जब रावण ने घमंड में आकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी थी। उसे लगा था कि वह एक वानर का मज़ाक उड़ा रहा है, लेकिन असल में वह अपने ही विनाश को न्यौता दे रहा था। हम सब जानते हैं कि हनुमान जी ने उस जलती हुई पूंछ से कूद-कूदकर रावण की 'सोने की लंका' को श्मशान बना दिया था।
लेकिन, इस हाहाकार और विनाश के बीच एक ऐसी चीज़ थी जो बिल्कुल सुरक्षित रही। एक ऐसा घर जिसे आग की लपटों ने हुआ तक नहीं। यह बात सुनने में थोड़ी हैरानी वाली लगती है न? कि जब पूरा शहर जल रहा हो, तो एक घर कैसे बच गया? आइए, आपको बताते हैं इसके पीछे का दिलचस्प और भावुक सच।
जब हनुमान जी की नज़र एक 'तुलसी' पर पड़ी
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब हनुमान जी लंका में एक छत से दूसरी छत पर कूदकर आग लगा रहे थे, तभी अचानक वो एक भवन के पास आकर रुक गए। उन्होंने देखा कि रावण की इस पापी नगरी में, जहाँ हर तरफ राक्षसों का बोलबाला है, वहाँ एक घर ऐसा है जिसके आंगन में तुलसी का पौधा लगा हुआ है।
हनुमान जी हैरान रह गए। उन्होंने गौर से देखा तो पाया कि उस भवन की दीवारों पर भगवान श्री हरि (विष्णु/राम) के आयुध जैसे धनुष-बाण के चिन्ह बने हुए थे। और तो और, उस घर से राम-नाम के जप की हल्की-हल्की आवाज़ भी आ रही थी।
"यह तो अपने वाले हैं!"
बजरंगबली तुरंत समझ गए कि यह कोई साधारण राक्षस का घर नहीं है, बल्कि किसी सच्चे राम-भक्त का निवास है। वो घर था रावण के छोटे भाई विभीषण का। हनुमान जी ने सोचा कि जिस घर में मेरे प्रभु का नाम लिया जा रहा है, उसे मैं कैसे जला सकता हूँ? आग तो बुराई को मिटाने के लिए है, भक्ति को नहीं। इसलिए उन्होंने विभीषण के भवन को छोड़ दिया और उसे आंच भी नहीं आने दी।
एक और बड़ी वजह: माँ सीता की सुरक्षा
सिर्फ विभीषण का घर ही नहीं, हनुमान जी ने अशोक वाटिका को भी आग से दूर रखा। क्यों? क्योंकि वहाँ जगज्जननी माँ सीता बैठी थीं।
हनुमान जी बहुत बुद्धिमान थे। उन्हें पता था कि अगर आग अशोक वाटिका तक पहुंच गई, तो अनर्थ हो जाएगा। साथ ही, वो प्रकृति और पेड़-पौधों का सम्मान करते थे। जिस जगह माँ सीता शरण लिए हुए थीं, उसे जलाना उनके लिए संभव ही नहीं था। इसीलिए उन्होंने लंका के उस हिस्से को बड़ी सावधानी से बचाया जहाँ माँ सीता और विभीषण रहते थे।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
दोस्तों, यह किस्सा हमें सिखाता है कि "बुरा वक्त चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो (जैसे पूरी लंका में आग), अगर आपके मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति है (जैसे विभीषण के घर राम नाम), तो मुसीबत आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती।"
हनुमान जी ने क्रोध में आकर लंका जरूर जलाई, लेकिन अपना विवेक नहीं खोया। इसे कहते हैं शक्ति के साथ भक्ति का सही मेल!