छात्रों के बड़े विरोध पर सरकार का जवाब ,धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा UGC नियम 2026 में किसी से भेदभाव नहीं होगा
News India Live, Digital Desk: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के प्रस्तावित नए नियमों को लेकर देश भर में छात्र, शिक्षक और कुछ राजनीतिक दलों के बीच जो विरोध और भ्रम फैला है, उस पर अब केंद्र सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि UGC के नियम 2026 को इस तरह से बनाया जा रहा है कि इसमें किसी भी छात्र के साथ किसी भी स्तर पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
शिक्षामंत्री का यह बयान तब आया है जब कई छात्र संगठन यूजीसी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं, और यहां तक कि सत्ताधारी दल (बीजेपी) के कुछ नेताओं ने भी इन नियमों की जटिलता पर सवाल उठाए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या सफाई दी?
शिक्षा मंत्री ने विरोध कर रहे छात्रों को यह संदेश दिया कि उन्हें इन नियमों के उद्देश्यों को गलत नहीं समझना चाहिए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर आधारित: धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी के ये सभी नए नियम पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy - NEP) 2020 के लक्ष्यों पर आधारित हैं। इन नियमों का लक्ष्य भारत के उच्च शिक्षा मानकों को विश्वस्तरीय बनाना है।
- गुणवत्ता पर ध्यान: नए नियम, जो 4 वर्षीय स्नातक प्रोग्राम और पीएचडी प्रवेश प्रक्रियाओं को संशोधित करते हैं, अंततः गुणवत्तापूर्ण रिसर्च (Research) और शैक्षिक ढांचे पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे।
छात्रों की चिंताएँ क्या हैं?
मंत्री की सफाई के बावजूद छात्रों की चिंताएँ बरकरार हैं, खासकर 70:30 (परीक्षा बनाम इंटरव्यू) अनुपात और 4 वर्षीय स्नातक डिग्री वाले छात्रों को मिलने वाली प्राथमिकता पर। उन्हें लगता है कि 30% वेटेज इंटरव्यू में देने से पारदर्शिता कम हो जाएगी और यह प्रक्रिया ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए मुश्किल होगी।
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान सरकार का पहला बड़ा आश्वासन है। अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल मौखिक आश्वासन न दें, बल्कि इन नियमों को ज़मीनी स्तर पर सरल और समावेशी बनाने के लिए छात्रों और शैक्षिक विशेषज्ञों के साथ संवाद करें।