डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया का तूफ़ान, कांग्रेस ने कर्नाटक में केंद्र सरकार के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?
News India Live, Digital Desk : कांग्रेस शासित राज्यों और केंद्र की बीजेपी सरकार के बीच चल रही तनातनी अब कर्नाटक में ज़मीन पर उतर आई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना MGNREGA (मनरेगा) का बकाया फंड रोकने का आरोप लगाते हुए, राज्य में 'राजभवन चलो' विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।
यह पहला मौका है जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री एक साथ किसी केंद्रीय योजना के बकाया पैसे को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन का मुद्दा क्या है?
कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य के विकास और गरीब ग्रामीणों से जुड़ी योजनाओं का फंड रोक रही है। मनरेगा योजना गरीब और ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन की गारंटीशुदा मज़दूरी प्रदान करती है।
- राजनीतिक बदले की भावना: सिद्धारमैया ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है।
- कर्नाटक के किसानों का मुद्दा: मनरेगा फंड के अलावा, राज्य में सूखे से हुए नुकसान के लिए सूखा राहत (Drought Relief) का पैसा जारी न करने को लेकर भी कांग्रेस नाराज है।
राजभवन चलो आंदोलन क्यों?
कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल (Governor) के आवास यानी राजभवन तक विरोध मार्च निकाला। राजभवन राज्य में संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। राजभवन को चुनना केंद्र सरकार के प्रति अपनी नाराज़गी और दबाव बनाने की स्पष्ट रणनीति है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विधायक, मंत्री, और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए, जिसने एक बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
मनरेगा का पैसा सीधे तौर पर ग्रामीण गरीब लोगों की आय से जुड़ा है। ऐसे में सीएम का खुद सड़क पर उतरना, बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है, जो हमेशा 'गरीब कल्याण' की बात करती है।