छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर उम्रकैद तक की सजा साय सरकार का नया कानून पास जानें क्या हैं सख्त प्रावधान
News India Live, Digital Desk : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बिल को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को बचाने के लिए एक 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बताया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य लोभ, लालच, डर या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
1. सजा के कड़े प्रावधान (Stringent Punishments)
नए कानून में अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा को कई गुना बढ़ा दिया गया है:
सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion): यदि एक साथ दो या दो से अधिक लोगों का धर्मांतरण कराया जाता है, तो दोषियों को 10 साल से लेकर उम्रकैद (Life Imprisonment) तक की सजा और न्यूनतम ₹25 लाख का जुर्माना हो सकता है।
नाबालिग, महिला या SC/ST का धर्मांतरण: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से विक्षिप्त या अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक की कैद और कम से कम ₹10 लाख जुर्माना होगी।
सामान्य उल्लंघन: अन्य मामलों में कम से कम 7 साल (जो 10 साल तक बढ़ सकती है) की सजा और ₹5 लाख जुर्माना तय किया गया है।
सरकारी कर्मचारी: यदि कोई लोक सेवक (Public Servant) इस अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 से 20 साल की जेल होगी।
2. 'धर्मांतरण' की नई और व्यापक परिभाषा
कानून ने 'प्रलोभन' और 'बल प्रयोग' को बहुत विस्तार से परिभाषित किया है:
प्रलोभन (Allurement): इसमें न केवल पैसा, बल्कि उपहार, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त इलाज, बेहतर जीवनशैली का वादा या शादी का लालच भी शामिल है।
बल प्रयोग (Coercion): इसमें शारीरिक हिंसा के अलावा मनोवैज्ञानिक दबाव, धमकी और 'सामाजिक बहिष्कार' को भी शामिल किया गया है।
डिजिटल माध्यम: सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए धर्मांतरण के लिए उकसाना भी इस कानून के दायरे में आएगा।
3. धर्मांतरण की प्रक्रिया अब 'पारदर्शी' (Mandatory Declaration)
अब केवल इच्छा होने पर धर्म बदलना संभव नहीं होगा, इसके लिए एक सख्त प्रक्रिया अपनानी होगी:
पूर्व सूचना: धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) या अधिकृत अधिकारी को घोषणा पत्र देना होगा।
सार्वजनिक नोटिस: प्रशासन इस सूचना को आधिकारिक वेबसाइट, तहसील कार्यालय और ग्राम पंचायत में सार्वजनिक करेगा ताकि 30 दिनों के भीतर कोई भी आपत्ति दर्ज करा सके।
सत्यापन: पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच करेंगे कि क्या यह धर्मांतरण वास्तव में स्वैच्छिक है या किसी दबाव में।
अमान्य शादियां: केवल धर्म बदलने के उद्देश्य से की गई शादियां इस कानून के तहत अमान्य (Invalid) घोषित की जा सकती हैं।
4. 'घर वापसी' को छूट (Ancestral Religion)
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने 'पैतृक धर्म' (Ancestral Religion) में वापस लौटता है (जिसे सामान्यतः 'घर वापसी' कहा जाता है), तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा और उस पर ये दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होंगे।