Garud Puran : आपके आज के कर्म तय करेंगे कल का पुनर्जन्म गरुड़ पुराण के अनुसार जानें अगला जन्म

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News India Live, Digital Desk: जैसा बोओगे, वैसा काटोगे” यह कहावत गरुड़ पुराण के सिद्धांतों पर पूरी तरह सटीक बैठती है। सनातन धर्म में माना जाता है कि आत्मा अमर है, लेकिन उसे मिलने वाला शरीर उसके पिछले जन्मों के कर्मों का कच्चा चिट्ठा होता है। भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को दिए उपदेशों में विस्तार से बताया है कि मनुष्य के कौन से कार्य उसे दोबारा मनुष्य योनि में लाते हैं और किन गलतियों के कारण उसे पशु-पक्षी या कीट-पतंग बनना पड़ता है।

अगला जन्म और कर्मों का कनेक्शन (The Law of Karma)

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय मनुष्य की जैसी 'वृत्ति' या सोच होती है, उसे वैसा ही जन्म मिलता है।

परोपकार और भक्ति: जो लोग जीवन भर दान-पुण्य, दूसरों की मदद और ईश्वर की भक्ति में लीन रहते हैं, उन्हें अगले जन्म में फिर से उत्तम कुल में मनुष्य का जन्म मिलता है।

अंतिम इच्छा का प्रभाव: मरते समय व्यक्ति जिस वस्तु या जीव का स्मरण करता है, पुनर्जन्म में उसका प्रभाव दिखता है।

किसे मिलता है कौन सा जन्म? (Reincarnation According to Deeds)

गरुड़ पुराण में कर्मों के आधार पर योनियों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार किया गया है:

कर्म (Deeds)अगला जन्म (Next Birth)
महिलाओं का अपमान करने वालाअगले जन्म में भयानक बीमारियों से ग्रस्त शरीर या नपुंसक योनि।
गुरु का अपमान करने वालामाना जाता है कि ऐसे व्यक्ति को ब्रह्मराक्षस या जलहीन जंगल में प्रेत बनना पड़ता है।
धोखाधड़ी और चोरी करने वालागरुड़ पुराण के अनुसार, दूसरों का धन हड़पने वाला व्यक्ति अगले जन्म में चूहा या नेवला बनता है।
हिंसा और हत्या करने वालानिर्दोष जीवों की हत्या करने वाले को कसाई के घर या जंगली हिंसक पशु (जैसे बाघ) के रूप में जन्म मिलता है।

मनुष्य योनि पाने के लिए क्या है अनिवार्य?

गरुड़ पुराण कहता है कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद बड़ी मुश्किल से मानव तन मिलता है। इसे सुरक्षित रखने के लिए:

सत्य का मार्ग: हमेशा सत्य बोलना और ईमानदारी से आजीविका कमाना।

धर्म का पालन: अपनी जिम्मेदारियों (पितृ धर्म, पुत्र धर्म, राज धर्म) को निष्ठा से निभाना।

क्षमा भाव: क्रोध का त्याग कर क्षमा को अपनाना।

 क्या कर्मों का फल बदला जा सकता है?

अध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि 'प्रायश्चित' के माध्यम से पिछले बुरे कर्मों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि मनुष्य को अपनी गलती का अहसास जीवित रहते हो जाए और वह सत्कर्मों की ओर मुड़ जाए, तो उसकी गति सुधर सकती है। गरुड़ पुराण हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने वाला ग्रंथ है।

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