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April 10 2026 11:54 am

चुनावी इतिहास में पहली बार अब उम्मीदवारों के सामने खुलेगी EVM की कुंडली, हाईकोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप

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News India Live, Digital Desk: भारत के चुनावी इतिहास में एक ऐसा मोड़ आ गया है जो पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब चुनाव हारने या जीतने वाले उम्मीदवारों के मन में ईवीएम (EVM) को लेकर उठने वाले सवालों का मौके पर ही समाधान हो सकेगा। एक ऐतिहासिक फैसले और चुनाव आयोग की नई पहल के तहत, देश में पहली बार उम्मीदवारों की मौजूदगी में ईवीएम और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी। इस आदेश के बाद अब वोटिंग मशीनों की शुद्धता पर उठने वाले विवादों पर विराम लगने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर 'अग्निपरीक्षा' से गुजरेगी मशीनें

हालिया कानूनी घटनाक्रमों और हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद चुनाव प्रणाली में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों को यह अधिकार है कि वे अपनी शंकाओं का समाधान मशीन की जांच करवाकर कर सकें। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र के उन बूथों की मशीनों को निकाला जाएगा, जिन पर उम्मीदवार ने आपत्ति दर्ज कराई है। यह पूरी प्रक्रिया बेहद सख्त प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी की जाएगी।

उम्मीदवारों की मौजूदगी में होगी 'माइक्रो कंट्रोलर' की जांच

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जांच के दौरान उम्मीदवार या उनके अधिकृत प्रतिनिधि वहां भौतिक रूप से मौजूद रहेंगे। मशीनों के 'बर्न-इन' मेमोरी और माइक्रो कंट्रोलर यूनिट की जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल जनता का भरोसा लोकतंत्र पर बढ़ेगा, बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जाने वाले 'EVM हैकिंग' के आरोपों की भी जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी।

खर्च उठाना होगा उम्मीदवार को, पारदर्शिता की नई मिसाल

नियमों के मुताबिक, जो उम्मीदवार ईवीएम की जांच करवाना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। यदि जांच में मशीन के साथ कोई भी गड़बड़ी या छेड़छाड़ पाई जाती है, तो जमा किया गया शुल्क वापस कर दिया जाएगा और मामले में कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि, यदि मशीन सही पाई जाती है, तो शुल्क जब्त कर लिया जाएगा। यह प्रक्रिया मतदान के नतीजे आने के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर शुरू की जाएगी, जिससे चुनावी नतीजों की विश्वसनीयता पर मुहर लग सके।