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April 10 2026 01:05 pm

Baisakhi 2026 : कब है फसल उत्सव और मेष संक्रांति? जानें शुभ मुहूर्त और आपकी राशि पर सूर्य के गोचर का प्रभाव

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News India Live, Digital Desk: खुशियों और उमंग का प्रतीक 'बैसाखी' (Baisakhi) का त्योहार इस साल 2026 में 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा। पंजाब और हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत में यह पर्व रबी की फसल कटने की खुशी और सिख नववर्ष के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिसे 'मेष संक्रांति' कहा जाता है।

बैसाखी और मेष संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य का राशि परिवर्तन ही बैसाखी की तिथि निर्धारित करता है। इस वर्ष के मुख्य मुहूर्त इस प्रकार हैं:

बैसाखी तिथि: 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार)।

मेष संक्रांति का क्षण: सुबह 09:39 बजे (जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे)।

पुण्य काल: सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक।

महा पुण्य काल: सुबह 07:30 से दोपहर 11:47 तक (दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)।

सिख धर्म और कृषि में बैसाखी का महत्व

बैसाखी का दिन केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि इसका गहरा ऐतिहासिक महत्व भी है। इसी दिन साल 1699 में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी। किसान इस दिन नई फसल का स्वागत करते हुए 'भांगड़ा' और 'गिद्दा' नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। गुरुद्वारों में विशेष अरदास और 'कड़ा प्रसाद' का वितरण किया जाता है।

सूर्य का मेष गोचर: इन राशियों की चमकेगी किस्मत

सूर्य देव जब मेष राशि में जाते हैं, तो वे अपनी उच्चतम शक्ति में होते हैं। 14 अप्रैल से शुरू होने वाला यह गोचर कई राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होगा:

मेष (Aries): सूर्य आपकी ही राशि के लग्न भाव में होंगे। आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि होगी और करियर में नेतृत्व के नए अवसर मिलेंगे।

मिथुन (Gemini): आय के नए स्रोत खुलेंगे और लंबे समय से रुकी हुई इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। व्यापार में बड़े मुनाफे के योग हैं।

सिंह (Leo): भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि (Salary Hike) की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं। धार्मिक यात्राओं के योग भी हैं।

वृश्चिक (Scorpio): समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है।

मेष संक्रांति पर क्या करें?

इस पावन दिन पर पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विधान है। दान-पुण्य के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गुड़, गेहूं और तांबे की वस्तुओं का दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।