बॉस की डांट और डेडलाइन का डर? ये 4 आसान ट्रिक्स आपकी 9 से 5 की जिंदगी आसान बना देंगे

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News India Live, Digital Desk: आजकल की कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि "स्ट्रेस" (Tension) हमें ऑफिस की सैलरी के साथ बोनस में मिलता है। काम का पहाड़, डेडलाइन का प्रेशर और ऊपर से बॉस की उम्मीदें— कभी-कभी ऐसा लगता है कि इंसान मशीन बन गया है। हम काम तो पूरा कर लेते हैं, लेकिन अपनी मेंटल हेल्थ (Mental Health) की धज्जियां उड़ा देते हैं।

अगर आप भी रोज शाम को घर लौटते वक्त थकान से ज्यादा चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं, तो अब रुक कर थोड़ा संभलने की जरूरत है। आज मैं आपको कोई किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि 4 ऐसे प्रैक्टिकल तरीके बताऊंगा/बताऊंगी जो ऑफिस के भारी-भरकम बोझ को हल्का करने में वाकई काम आते हैं।

1. 'ना' कहना भी सीखें और सीमाएं बनाएं
हम भारतीयों को 'ना' कहने में बहुत शर्म आती है। हमें लगता है कि अगर मना किया तो बॉस नाराज हो जाएगा। लेकिन सच यह है कि अगर आपकी थाली पहले से भरी है, तो और परोसने का कोई मतलब नहीं। अगर काम बहुत ज्यादा है, तो विनम्रता से (Politely) अपने मैनेजर को बताएं कि "अभी मैं इस प्रोजेक्ट पर हूं, नया काम लेने से क्वालिटी खराब हो सकती है।" अपनी सीमाएं तय करें। ऑफिस का काम ऑफिस तक रखें, उसे घर के डिनर टेबल पर न लाएं।

2. एक 'टू-डू लिस्ट' (To-Do List) है आपका सबसे बड़ा हथियार
जब बहुत सारा काम एक साथ दिखता है, तो घबराहट होती है। सुबह ऑफिस पहुंचते ही सबसे पहले एक डायरी लें और काम को तीन हिस्सों में बांट लें:

  • सबसे जरूरी: जो आज हर हाल में करना है।
  • मध्यम: जो आज नहीं तो कल तक हो सकता है।
  • कम जरूरी: जिसे बाद में फुर्सत में करेंगे।
    एक बार में एक ही काम पर फोकस करें (Multitasking से बचें)। जैसे-जैसे लिस्ट में टिक लगता जाएगा, आपका स्ट्रेस लेवल अपने आप नीचे आ जाएगा।

3. रोबोट न बनें, छोटे ब्रेक लें
लगातार 4-5 घंटे कुर्सी पर चिपके रहने से प्रोडक्टिविटी बढ़ती नहीं, बल्कि घटती है। हर एक-दो घंटे में 5 मिनट का छोटा सा ब्रेक लें। अपनी सीट से उठें, पानी पिएं, किसी सहकर्मी से 2 मिनट हंस-बोल लें या बस खिड़की से बाहर देख लें। यह छोटा सा "रीसेट" बटन आपके दिमाग को फ्रेश कर देता है और आप काम को बेहतर ढंग से कर पाते हैं।

4. अपनी डेस्क साफ़ रखें, दिमाग शांत रहेगा
आपको यह शायद अजीब लगे, लेकिन यह सच है। अगर आपकी टेबल पर फाइलों का ढेर, पुराने कॉफ़ी के कप और बिखरे कागज हैं, तो उन्हें देखकर ही आपको तनाव होगा। 'अव्यवस्थित डेस्क' का मतलब है 'अव्यवस्थित दिमाग'। अपनी जगह को साफ़-सुथरा रखें। एक साफ़ डेस्क पर बैठकर काम करने से एक अलग ही पॉजिटिव एनर्जी (Positive Energy) मिलती है और काम का बोझ कम लगता है।

याद रखें: काम जिंदगी का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। इसलिए अपनी सेहत और सुकून से समझौता न करें। आज ही इन तरीकों को आजमा कर देखें!