China's Peace Move : ईरान-अमेरिका युद्ध रोकने के लिए चीन आया आगे, कहा यह कभी नहीं होना चाहिए था
News India Live, Digital Desk: ओमान में हुए ड्रोन हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद भड़के इस युद्ध में अब चीन ने "शांतिदूत" की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। चीन का कहना है कि सैन्य विकल्प किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी।
चीन के 'शांति प्रस्ताव' की 3 मुख्य बातें
बीजिंग ने इस संकट को सुलझाने के लिए निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं:
तत्काल युद्धविराम (Ceasefire): चीन ने सभी पक्षों से तुरंत सैन्य अभियान रोकने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
विशेष दूत की नियुक्ति: चीन ने अपने मध्य पूर्व के विशेष दूत झाई जुन (Zhai Jun) को खाड़ी देशों के दौरे पर भेजा है ताकि ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच संवाद का रास्ता साफ हो सके।
संप्रभुता का सम्मान: चीन का रुख स्पष्ट है कि किसी भी देश में "सत्ता परिवर्तन" (Regime Change) के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप गलत है।
चीन के लिए क्या है दांव पर? (Strategic Stakes)
चीन इस युद्ध को रोकने के लिए इतना सक्रिय क्यों है? इसके पीछे बड़े आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं:
तेल की आपूर्ति: चीन अपनी जरूरत का लगभग 13% तेल ईरान से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से चीन की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
निवेश: चीन ने ईरान में 25 वर्षीय सहयोग समझौते के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया है, जो युद्ध की स्थिति में डूब सकता है।
वैश्विक छवि: 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच सफल मध्यस्थता कराने के बाद, चीन अब खुद को अमेरिका के मुकाबले एक अधिक विश्वसनीय "शांति निर्माता" के रूप में पेश करना चाहता है।
[Image showing Chinese Special Envoy Zhai Jun meeting Middle Eastern leaders]
अमेरिका और ट्रंप का रुख: क्या मानेंगे शर्त?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने में मदद मांगी है, लेकिन चीन ने अभी तक इस पर कोई सीधा आश्वासन नहीं दिया है।
ट्रंप की यात्रा टली: इसी तनाव के कारण राष्ट्रपति ट्रंप की 31 मार्च को प्रस्तावित बीजिंग यात्रा भी टल गई है।
ईरान की मांग: ईरान ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उसे हुए नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए।
युद्ध का अब तक का असर (Brief Update):
जान-माल का नुकसान: हमलों में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
वैश्विक परिवहन: होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ठप होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।