इजरायल-ईरान समेत 9 देशों के एयरस्पेस पर पाबंदी, DGCA ने जारी की नो फ्लाई एडवाइजरी
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (Middle East) में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग ने वैश्विक विमानन क्षेत्र में खलबली मचा दी है। युद्ध की विभीषिका और मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए भारत के विमानन नियामक DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने भारतीय एयरलाइंस के लिए एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस फैसले के तहत खाड़ी के 9 संवेदनशील देशों के हवाई क्षेत्र (Airspace) से बचने की सलाह दी गई है, जिसका सीधा असर भारत से यूरोप और पश्चिम जाने वाली उड़ानों पर पड़ेगा।
इन 9 देशों के ऊपर उड़ने पर 'रेड सिग्नल', रूट बदलने की तैयारी
DGCA द्वारा जारी विशेष निर्देश में भारतीय विमान कंपनियों को बहरीन, ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हवाई क्षेत्र का उपयोग न करने या बेहद सावधानी बरतने को कहा गया है। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में उड़ते विमानों पर मिसाइल या ड्रोन हमले के जोखिम को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। एयरलाइंस को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन देशों के ऊपर से गुजरने के बजाय वैकल्पिक और सुरक्षित रास्तों का चुनाव करें, भले ही इसमें उड़ान का समय और ईंधन थोड़ा ज्यादा खर्च हो।
32,000 फीट से नीचे उड़ान भरने पर रोक, जानें सऊदी और ओमान के लिए नए नियम
सिर्फ एयरस्पेस से बचना ही काफी नहीं है, DGCA ने ऊंचाई को लेकर भी कड़े मानक तय किए हैं। विमान कंपनियों से कहा गया है कि वे सौदी अरब और ओमान के हवाई क्षेत्र में FL320 (32,000 फीट) से नीचे उड़ान न भरें। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऊंचाई से ऊपर विमान किसी भी संभावित जमीनी हमले या मिसाइल इंटरसेप्शन की रेंज से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
28 मार्च तक अलर्ट मोड पर भारत, एयरलाइंस को मिला 'इमरजेंसी प्लान' का टास्क
यह एडवाइजरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और फिलहाल 28 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। DGCA ने एयरलाइंस को एक मजबूत 'बैकअप प्लान' और इमरजेंसी रिस्क असेसमेंट तैयार रखने का निर्देश दिया है। इसके तहत अगर बीच रास्ते में युद्ध की स्थिति बिगड़ती है, तो विमानों को तुरंत डायवर्ट करने के लिए वैकल्पिक हवाई अड्डों और ईंधन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करनी होगी। पायलटों और क्रू मेंबर्स को पल-पल की जानकारी के लिए NOTAMs (Notice to Airmen) पर नजर रखने को कहा गया है ताकि रियल-टाइम पाबंदियों की जानकारी मिल सके।
यात्रियों पर क्या होगा असर? बढ़ सकता है उड़ानों का समय
इस एडवाइजरी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के समय और किराए पर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि हवाई मार्ग बदलने (Re-routing) के कारण उड़ानों की अवधि 1 से 2 घंटे तक बढ़ सकती है। खाड़ी देशों के रास्ते यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए अब लंबी दूरी का रास्ता अपनाना होगा। DGCA ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया के हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर इस एडवाइजरी की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।