Russian Oil U-Turn : चीन जा रहे रूसी तेल टैंकरों ने समंदर में लिया यू-टर्न, अब भारत की ओर बढ़ रहा Aqua Titan
News India Live, Digital Desk : दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच एक बड़ा उलटफेर हुआ है। जहाज-ट्रैकिंग डेटा (Ship-tracking data) के अनुसार, कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर, जो मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुए थे, उन्होंने बीच रास्ते में अपनी मंजिल बदल ली है। इनमें सबसे प्रमुख टैंकर 'एक्वा टाइटन' (Aqua Titan) है, जो दक्षिण चीन सागर में यू-टर्न लेकर अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है।
'एक्वा टाइटन' और 'ज़ूज़ू एन.': भारत के लिए नए खेप
एक्वा टाइटन (Aqua Titan): यह एफ्रामैक्स (Aframax) जहाज रूस के 'उरल्स' (Urals) कच्चे तेल से भरा है। पहले यह चीन के रिझाओ पोर्ट जा रहा था, लेकिन अब यह 21 मार्च 2026 को भारत के न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचने वाला है।
ज़ूज़ू एन. (Zouzou N.): कजाकिस्तान का 'सीपीसी ब्लेंड' क्रूड ले जा रहा यह सुएज़मैक्स टैंकर भी अब चीन के बजाय भारत के सिक्का (Sikka) बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और 25 मार्च तक यहाँ पहुंच सकता है।
क्यों बदला गया रास्ता? (3 मुख्य कारण)
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण दुनिया का सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इस रास्ते से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20-25% हिस्सा गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है।
अमेरिका से मिली 'ग्रीन लाइट': पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल की खरीद बढ़ाने के लिए अस्थायी 'छूट' (Waiver) दी है। इस रियायत के मिलते ही भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी दिखाई और महज एक हफ्ते में 30 मिलियन बैरल रूसी तेल का सौदा कर लिया।
चीन को पछाड़ा: भारतीय रिफाइनरियां इस समय रूसी तेल के लिए चीन से भी ऊंची बोली (Outbidding) लगा रही हैं, ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा: रिफाइनर हुए सक्रिय
ईरान से होने वाली आपूर्ति रुकने के बाद भारत के सभी प्रमुख रिफाइनर अब रूसी कच्चे तेल के लिए बाजार में उतर आए हैं। जानकारों का मानना है कि रूस से आने वाला यह रियायती तेल भारत को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से बचाने में 'बफर' का काम करेगा।
बाजार पर असर:
कीमतें: भारत के पश्चिमी तट पर उरल्स कच्चे तेल की कीमत लगभग $98.93 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
आपूर्ति: भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब रूस, अमेरिका और अन्य सुरक्षित मार्गों से पूरा करने की कोशिश कर रहा है।