Fatty Liver Alert: अब एक साधारण टेस्ट से पता चलेगा फैटी लीवर का खतरा! वैज्ञानिकों ने खोजा TyGWHtR का नया फॉर्मूला; जानें कैसे बचाएगा जान
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी सफलता हाथ लगी है। एक हालिया बड़े शोध (Research) में यह सामने आया है कि TyGWHtR (ट्राइग्लिसराइड-ग्लूकोज-कमर-से-ऊंचाई अनुपात) एक ऐसा सटीक पैमाना है जो बुजुर्गों में 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज' (NAFLD) की पहचान समय रहते कर सकता है। यह नया और सरल स्क्रीनिंग टूल प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में लीवर की बीमारियों के निदान का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर (NAFLD): एक 'खामोश' बीमारी
फैटी लीवर एक ऐसी मेटाबॉलिक स्थिति है जिसमें बिना शराब के सेवन के भी लीवर में वसा (Fat) जमा होने लगती है।
खतरा: यह सामान्य सूजन से शुरू होकर लीवर सिरोसिस और लीवर फेलियर जैसी जानलेवा स्थिति तक पहुँच सकता है।
चुनौती: शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, जिसके कारण डॉक्टरों के लिए इसकी पहचान करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।
क्या है TyGWHtR और यह कैसे काम करता है?
TyGWHtR एक मिश्रित सूचकांक (Index) है, जो तीन मुख्य स्वास्थ्य मानकों को जोड़कर बनाया गया है:
ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides): रक्त में मौजूद वसा का स्तर।
ग्लूकोज (Glucose): ब्लड शुगर का स्तर।
Waist-to-Height Ratio: कमर का घेरा और ऊंचाई का अनुपात।
डॉक्टरों का मानना है कि यह इंडेक्स 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' और 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' (पेट की चर्बी) को दर्शाता है, जो फैटी लीवर के सबसे प्रमुख कारण माने जाते हैं। शोध के अनुसार, यह पारंपरिक मोटापे के मापदंडों (जैसे BMI) की तुलना में कहीं अधिक सटीक परिणाम देता है।
जल्दी पहचान: रिकवरी की बढ़ेगी उम्मीद
आमतौर पर फैटी लीवर का पता तब चलता है जब बीमारी एडवांस स्टेज पर पहुँच जाती है और लीवर को नुकसान हो चुका होता है।
सरलता: TyGWHtR को एक सामान्य ब्लड टेस्ट और इंची टेप की मदद से कैलकुलेट किया जा सकता है।
फायदा: इसकी मदद से डॉक्टर प्राथमिक स्तर पर ही उन मरीजों की पहचान कर पाएंगे जिन्हें भविष्य में विशेषज्ञों या एडवांस इमेजिंग (जैसे फाइब्रोस्कैन) की जरूरत पड़ सकती है।
बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से कारगर
बढ़ती उम्र के साथ मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ना आम है, जिससे लीवर की बीमारियों का खतरा दोगुना हो जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्लीनिकों में यह टूल रिस्क असेसमेंट को बेहतर बनाएगा, जिससे समय रहते खान-पान और जीवनशैली में बदलाव कर लीवर को सुरक्षित रखा जा सकेगा।