China Population Crisis: चीन में 'महा-संकट'! 1949 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंची जन्म दर; बुजुर्ग होता समाज और खाली होते पालने बढ़ा रहे बीजिंग की टेंशन
बीजिंग/नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय एक ऐसे दुश्मन से जूझ रहा है जिसे सीमा पर सेना से नहीं हराया जा सकता—वह है 'घटती आबादी'। ताज़ा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सरकार द्वारा तमाम प्रोत्साहन राशि और नीतियों के बावजूद वहां की जन्म दर ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल चीन में केवल 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो 1949 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है। दशकों तक चली 'वन चाइल्ड पॉलिसी' का असर अब चीन के आर्थिक और सामाजिक ढांचे पर गहरा घाव कर रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों कांप रहा है चीन?
चीन की जनसांख्यिकीय तस्वीर साल-दर-साल धुंधली होती जा रही है:
जन्म दर में भारी गिरावट: पिछले वर्ष की तुलना में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में 17% की गिरावट दर्ज की गई है।
आबादी का सिकुड़ना: चीन की कुल आबादी घटकर अब 1.4049 अरब रह गई है।
बढ़ती मौतें: पिछले साल 1.13 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई, जो पिछले पांच दशकों में सबसे अधिक है।
क्यों माता-पिता नहीं बनना चाहते चीनी युवा?
चीन के युवाओं में शादी और बच्चों के प्रति बढ़ती बेरुखी के पीछे कई गहरे सामाजिक-आर्थिक कारण हैं:
आर्थिक बोझ: बच्चों की पढ़ाई (Education) और पालन-पोषण का खर्च आसमान छू रहा है।
आवास असुरक्षा: बड़े शहरों में घरों की बढ़ती कीमतें युवाओं को शादी से दूर रख रही हैं।
कठिन वर्क कल्चर: कार्यस्थल पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लंबे कामकाजी घंटों के कारण 'वर्क-लाइफ बैलेंस' बिगड़ चुका है।
बदलता सामाजिक नजरिया: युवा पीढ़ी अब देर से शादी करने या बिल्कुल भी शादी न करने को प्राथमिकता दे रही है।
बीजिंग का 'बेबी बोनस' और प्रोत्साहन योजनाएं
आबादी की गिरावट को रोकने के लिए चीनी सरकार ने अब सरकारी खजाना खोल दिया है:
चाइल्डकेयर सब्सिडी: तीन साल से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे के लिए 10,800 युआन (लगभग ₹1.28 लाख) की राष्ट्रीय सब्सिडी लागू की गई है।
शादी के नियमों में बदलाव: शादी के पंजीकरण को आसान बनाया गया है, जबकि तलाक की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया गया है।
बीमा कवरेज: प्रसव (Childbirth) के खर्चों को कवर करने के लिए बीमा पॉलिसियों का विस्तार किया गया है।
भविष्य की चुनौती: क्या सुधरेंगे हालात?
हालांकि, साल 2025 की पहली तीन तिमाहियों में शादी के पंजीकरण में 8.5% की वृद्धि देखी गई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि 2026 में जन्म दर 80 लाख के पार जा सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नकद सब्सिडी से काम नहीं चलेगा। जब तक किफायती आवास, लैंगिक समानता वाली रोजगार नीतियां और भरोसेमंद चाइल्डकेयर व्यवस्था नहीं होगी, तब तक चीन के 'खाली होते पालनों' को भरना मुश्किल होगा।
आर्थिक प्रभाव: कमजोर होगा ड्रैगन?
घटती और बुजुर्ग होती आबादी का सीधा असर चीन की उत्पादकता और पेंशन प्रणाली पर पड़ेगा। यदि उपभोक्ता आधार (Consumers) कम होता है, तो घरेलू मांग घटेगी, जिससे भविष्य में चीन की वैश्विक आर्थिक बादशाहत को बड़ा झटका लग सकता है।