Music Industry Rift : रहमान सर की बात 100% सच है ,अमाल मलिक ने म्यूजिक माफिया के खिलाफ खोला मोर्चा
News India Live, Digital Desk: ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने कुछ समय पहले बॉलीवुड में चल रही 'गुटबाजी' और 'म्यूजिक माफिया' को लेकर जो संकेत दिए थे, अब उन्हें युवा पीढ़ी का भी साथ मिल गया है। मशहूर संगीतकार और गायक अमाल मलिक ने रहमान के बयानों को पूरी तरह सही करार देते हुए इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाई बयां की है। अमाल का कहना है कि आज के दौर में प्रतिभा से ज्यादा 'पावर गेम्स' और 'कांट्रैक्ट्स' को तवज्जो दी जा रही है।
अमाल मलिक का बड़ा खुलासा: "यहाँ काम माँगना सजा जैसा है"
अमाल मलिक ने एक ताजा पॉडकास्ट में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि रहमान सर जैसे लेजेंड का यह कहना कि उन्हें बॉलीवुड में काम करने से रोका जा रहा है, एक डरावनी हकीकत है।
गुटबाजी का बोलबाला: अमाल के अनुसार, म्यूजिक लेबल और फिल्म निर्माता अक्सर अपने 'खास लोगों' को ही काम देते हैं, भले ही दूसरे कलाकार उनसे बेहतर क्यों न हों।
क्रिएटिविटी पर हमला: "जब आपसे कहा जाता है कि आपको इस खास तरह का ही गाना बनाना है वरना आपको फिल्म से बाहर कर दिया जाएगा, तो एक कलाकार के तौर पर आपका दम घुटने लगता है," अमाल ने अपनी आपबीती साझा की।
क्या था एआर रहमान का वो बयान? (The Root Cause)
बता दें कि एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक पूरा गिरोह (Gang) काम कर रहा है, जो उनके बारे में झूठी अफवाहें फैलाता है ताकि उन्हें फिल्में न मिलें। अमाल ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कुछ प्रमुख चुनौतियां गिनाईं:
| समस्या | अमाल मलिक का नजरिया |
|---|---|
| रीमिक्स कल्चर | नए और ऑरिजनल गानों के बजाय पुराने गानों के रीमिक्स को थोपा जा रहा है। |
| पेमेंट और रॉयल्टी | संगीतकारों को उनकी मेहनत का सही हक और क्रेडिट नहीं दिया जाता। |
| एकाधिकार (Monopoly) | कुछ चुनिंदा म्यूजिक कंपनियां ही तय करती हैं कि जनता क्या सुनेगी। |
अमाल मलिक: "मुझे भी बनाया गया निशाना"
अमाल ने यह भी संकेत दिया कि अपने बेबाक अंदाज और सच बोलने की वजह से उन्हें भी कई प्रोजेक्ट्स से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने कहा, "जब आप सच बोलते हैं, तो लोग आपके साथ काम करना बंद कर देते हैं। लेकिन मैं रहमान सर की तरह अपने काम और ईमानदारी से समझौता नहीं कर सकता।"
क्या बदल पाएगा संगीत का भविष्य?
अमाल मलिक और अरिजीत सिंह जैसे कलाकार अब धीरे-धीरे अपनी स्वतंत्र पहचान (Independent Music) बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ओटीटी (OTT) और स्वतंत्र संगीत के आने से बॉलीवुड म्यूजिक माफिया का दबदबा कम हो सकता है। अमाल का समर्थन यह दर्शाता है कि अब इंडस्ट्री के भीतर से ही बदलाव की मांग उठने लगी है।