सबको लगा इजरायल युद्ध चाहता है, लेकिन नेतन्याहू ने तो ट्रंप को ही रोक दिया था, जानिए ईरान पर हमले का वो सीक्रेट

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News India Live, Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी अजीब चीज़ है। बाहर से देखने पर लगता है कि दो देश एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे क्या चल रहा होता है, इसकी खबर जब बाहर आती है तो दुनिया दंग रह जाती है। आज कुछ ऐसा ही खुलासा हुआ है इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर।

हम सब जानते हैं कि इजरायल और ईरान के रिश्ते कितने खराब हैं। अक्सर नेतन्याहू ईरान को दुनिया का सबसे बड़ा खतरा बताते हैं, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने दावा किया है कि जब डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में ईरान पर हमला करना चाहते थे, तब खुद नेतन्याहू ने ही उन्हें इसके लिए मना किया था।

सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, है ना?
जिस नेतन्याहू को दुनिया का सबसे बड़ा 'ईरान विरोधी' माना जाता है, भला वो क्यों किसी हमले को रोकेंगे? दरअसल, रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला तब का है जब मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया था। ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई करने की सोच रहा था, लेकिन इजरायली पक्ष की ओर से सलाह दी गई कि शायद यह हमला करने का सही समय नहीं है।

नेतन्याहू ने ऐसा क्यों किया होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू जानते थे कि अगर अमेरिका उस समय ईरान पर सीधा हमला करता, तो इसके नतीजे पूरे मध्य पूर्व को तबाह कर सकते थे। शायद उन्हें डर था कि ईरान के जवाबी हमले का सबसे ज्यादा असर इजरायल पर होगा। अक्सर राजनीति में जो दिखता है, वो होता नहीं है। सार्वजनिक मंचों पर नेतन्याहू भले ही सख्त तेवर अपनाते रहे हों, लेकिन सुरक्षा के मोर्चे पर शायद वे उस समय फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे।

क्या आज भी कहानी वही है?
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब आज फिर दुनिया को लग रहा है कि इजरायल और ईरान के बीच किसी भी वक्त युद्ध छिड़ सकता है। अब जब डोनाल्ड ट्रंप दोबारा चर्चा में हैं, तो क्या उनके और नेतन्याहू के बीच की यह 'सीक्रेट ट्यूनिंग' फिर से वैसी ही रहेगी?

कुल मिलाकर, यह खबर हमें सिखाती है कि राजनीति में 'दोस्त' और 'दुश्मन' के रिश्ते केवल भाषणों से तय नहीं होते, बल्कि परदे के पीछे बहुत सारे समीकरण देखे जाते हैं।