यूजीसी का बड़ा फैसला: नए सेशन से MPT और MOT की डिग्री में जुड़ेंगी स्पेशलाइजेशन

यूजीसी का बड़ा फैसला: नए सेशन से MPT और MOT की डिग्री में जुड़ेंगी स्पेशलाइजेशन

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश भर के मेडिकल और पैरामेडिकल छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है। यूजीसी ने एलाइड और हेल्थकेयर एजुकेशन (Allied and Healthcare Education) से जुड़े डिग्री पाठ्यक्रमों के नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इस नए बदलाव के तहत अब मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (M.PT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (M.OT) की डिग्रियां किसी सामान्य मास्टर डिग्री के रूप में नहीं दी जाएंगी, बल्कि इन्हें सीधे तौर पर संबंधित स्पेशलाइजेशन यानी विशेषज्ञता के नाम के साथ जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस अधिसूचना को आधिकारिक गजट में भी प्रकाशित कर दिया गया है, जो शैक्षणिक सत्र से पूरे देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू होने जा रहा है। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मिलने वाली डिग्रियों को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है, ताकि मेडिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में जॉब मार्केट की जरूरतों के अनुसार योग्य विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें।

M.PT और M.OT कोर्सेज में तय किए गए नए स्पेशलाइजेशन और कोर्स का ढांचा

यूजीसी के इस नए संशोधित नियमों के अनुसार, M.PT और M.OT दोनों ही मास्टर कोर्सेज की न्यूनतम अवधि 2 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसके लिए छात्रों के पास संबंधित विषय में बैचलर डिग्री होना अनिवार्य होगा। मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (M.OT) के अंतर्गत कुल 8 प्रमुख स्पेशलाइजेशन शामिल किए गए हैं, जिनमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज, मेंटल हेल्थ, कार्डियोवास्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, रिहैबिलिटेशन, जेरियाट्रिक्स, हैंड और ऑन्कोलॉजिकल साइंसेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। ठीक इसी प्रकार, मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (M.PT) कोर्स के ढांचे में भी बड़े बदलाव करते हुए इसे स्पेशलाइजेशन के आधार पर बांट दिया गया है, जिसमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, कार्डियोवास्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इन तमाम बदलावों से छात्रों को अपनी पसंद और विशेषज्ञता के क्षेत्र में गहराई से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा और उनकी डिग्री पर सीधे तौर पर उनकी महारत का नाम दर्ज होगा, जिससे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके लिए रोजगार के नए और बेहतर रास्ते खुलेंगे।

पुराने छात्रों के लिए नियम और हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े अन्य पाठ्यक्रमों का विस्तार

इस नए बदलाव को लेकर छात्रों के मन में उठने वाली शंकाओं को दूर करते हुए यूजीसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह नया नियम उन स्टूडेंट्स पर बिल्कुल भी लागू नहीं होगा जिन्होंने निर्धारित शैक्षणिक सत्र से पहले ही M.PT या M.OT पाठ्यक्रमों में अपना एडमिशन ले लिया था। पुराने छात्रों को उनके पुराने नियमों और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही डिग्री प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) की सिफारिशों के आधार पर इस पांचवें संशोधन में कई अन्य महत्वपूर्ण पैरामेडिकल और हेल्थकेयर कोर्सेज को भी जोड़ा गया है। इनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स, मेडिकल रेडियोलॉजी, डायलिसिस थेरेपी और रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी जैसे कई आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी का यह कदम देश के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना देगा, जिससे आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा के क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन और अधिक मजबूत हो सकेगा।