Education Policy : क्या PhD करना अब और मुश्किल हो जाएगा? UGC के नए नियमों पर कुमार विश्वास ने उठाए बड़े सवाल
News India Live, Digital Desk: आजकल सोशल मीडिया पर छात्रों के बीच यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC के कुछ नए नियमों को लेकर खूब चर्चा हो रही है। इस बहस में अब देश के जाने-माने कवि और वक्ता डॉ. कुमार विश्वास भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने छात्रों का समर्थन करते हुए इन नियमों को वापस लेने की मांग की है, जिसके बाद से यह मुद्दा और भी गरमा गया है।
आखिर ऐसा क्या है UGC के इन नियमों में?
असल में, UGC ने पीएचडी (PhD) में दाखिले को लेकर कुछ नए नियम बनाए हैं, जो आने वाले समय में लागू हो सकते हैं। इन नियमों को लेकर छात्रों और शिक्षकों के एक बड़े वर्ग में नाराज़गी है। उनका मानना है कि ये नियम उच्च शिक्षा को और महंगा और कुछ खास लोगों तक सीमित बना देंगे। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर #RollBack_UGC_Rules जैसा हैशटैग भी चलाया जा रहा है। कुमार विश्वास ने इसी हैशटैग को शेयर करते हुए लिखा कि ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिससे सामान्य घरों से आने वाले प्रतिभाशाली बच्चों के लिए रिसर्च और उच्च शिक्षा के रास्ते बंद हो जाएं।
क्या बदलाव हो सकते हैं और चिंता क्यों है?
यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, पीएचडी में एडमिशन के लिए 70% वेटेज लिखित परीक्षा का होगा और 30% इंटरव्यू का। आलोचकों का मानना है कि इंटरव्यू में 30% वेटेज देने से भेदभाव की गुंजाइश बढ़ सकती है।
इसके अलावा, सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर यूनिवर्सिटीज को अपनी फीस तय करने की ज़्यादा आज़ादी मिल गई तो पीएचडी करना बहुत खर्चीला हो सकता है। आज भी कई छात्र मुश्किल से अपनी पढ़ाई का खर्च उठा पाते हैं। अगर फीस बहुत बढ़ गई, तो गांव और छोटे शहरों के अनगिनत छात्र रिसर्च करने का सपना ही छोड़ देंगे।
कुमार विश्वास ने क्यों कहा 'रोल बैक'?
कुमार विश्वास का मानना है कि शिक्षा सबका अधिकार है और इसे व्यापार नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने अपनी आवाज़ उन लाखों छात्रों के लिए उठाई है जो देश के भविष्य हैं और रिसर्च के ज़रिए देश को आगे ले जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों को बढ़ावा दें, न कि उनके रास्ते में रुकावट पैदा करें।
फिलहाल, इस मामले पर बहस जारी है। छात्र लगातार सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात रख रहे हैं। अब देखना यह है कि सरकार और यूजीसी छात्रों की इन चिंताओं पर कितना ध्यान देते हैं और क्या इन नियमों पर फिर से विचार किया जाएगा।