Pax Silica : क्या है भारत-अमेरिका की वो महा-डील जिससे चीन की दुखती रग दब गई? जानें आसान भाषा में सब कुछ
News India Live, Digital Desk : 21वीं सदी की लड़ाई अब सरहदों से ज्यादा टेक्नोलॉजी के मैदान में लड़ी जा रही है। 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'India AI Impact Summit' में भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले 'Pax Silica' एलायंस का हिस्सा बनने का ऐलान कर दिया। इस समझौते को वैश्विक राजनीति और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक 'गेम चेंजर' माना जा रहा है।
1. आखिर क्या है Pax Silica? (Explainer)
इसका नाम दो शब्दों से मिलकर बना है Pax (लैटिन शब्द जिसका अर्थ है 'शांति और समृद्धि') और Silica (सिलिकॉन डाइऑक्साइड, जिससे सेमीकंडक्टर चिप्स बनते हैं)।
यह उन देशों का एक रणनीतिक और आर्थिक क्लब है जो मानते हैं कि भविष्य की शक्ति AI (Artificial Intelligence), सेमीकंडक्टर (चिप्स) और क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) में निहित है। इसे दिसंबर 2025 में अमेरिका द्वारा लॉन्च किया गया था।
2. कौन-कौन से देश हैं इसके सदस्य?
इसमें अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं। अब भारत के जुड़ने से यह गठबंधन और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया है।
3. भारत के लिए यह क्यों है 'मास्टरस्ट्रोक'?
चिप निर्माण में क्रांति: भारत पहले से ही 10 सेमीकंडक्टर प्लांट पर काम कर रहा है। 'पैक्स सिलिका' का हिस्सा बनने से भारत को दुनिया की सबसे एडवांस (2-nanometer) चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी तक सीधी पहुँच मिलेगी।
चीन की दादागिरी पर लगाम: वर्तमान में सेमीकंडक्टर और 'रेयर अर्थ मिनरल्स' पर चीन का लगभग एकाधिकार है। चीन अक्सर इनकी सप्लाई रोककर दुनिया को 'ब्लैकमेल' करता है। यह गठबंधन एक ऐसी सुरक्षित सप्लाई चेन बनाएगा जो चीन पर निर्भरता खत्म कर देगी।
रोजगार के अवसर: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस सेक्टर में आने वाले समय में 10 लाख स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी, जिसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय युवाओं को मिलेगा।
4. "वेपनाइज्ड डिपेंडेंसी" को 'ना'
अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए कहा, "आज हम 'वेपनाइज्ड डिपेंडेंसी' (निर्भरता को हथियार बनाना) को 'ना' कहते हैं।" उनका इशारा साफ तौर पर चीन की ओर था।
चीन को झटका क्यों? भारत के पास इन खनिजों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और अमेरिका की टेक्नोलॉजी मिलकर एक ऐसा 'भरोसेमंद इकोसिस्टम' तैयार करेंगे जिसमें चीन के लिए कोई जगह नहीं होगी।
5. आपके जीवन पर क्या होगा असर?
सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स: भविष्य में स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक गाड़ियां सस्ती हो सकती हैं क्योंकि उनकी चिप्स और बैटरी की सप्लाई चेन सुरक्षित होगी।
सुरक्षित डेटा: यह गठबंधन यह भी सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की AI तकनीक लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हो और डेटा चोरी जैसी समस्याओं से सुरक्षित रहे।