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April 10 2026 02:20 pm

लखनऊ: निजी स्कूलों की मनमानी पर डीएम का हंटर; 5 साल तक नहीं बदलेगी यूनिफॉर्म, उल्लंघन पर 5 लाख का जुर्माना

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लखनऊ: नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और जबरन सामग्री खरीदने के दबाव की शिकायतों पर जिलाधिकारी विशाख जी ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में डीएम ने स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

डीएम विशाख जी के मुख्य निर्देश: स्कूलों के लिए नए नियम

5 साल तक यूनिफॉर्म पर 'लॉक': जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल हर एक-दो साल में यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेगा। न्यूनतम 5 शैक्षणिक सत्र के बाद ही ड्रेस बदलने पर विचार किया जा सकता है।

विशेष दुकान से खरीदारी पर रोक: छात्रों या अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, जूते, मोजे या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वाले स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी।

NCERT की अनिवार्यता: जिन स्कूलों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। भारी-भरकम प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थोपना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

फीस वृद्धि की सीमा: फीस में वृद्धि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5% की सीमा के भीतर ही की जा सकती है। इसके अलावा किसी भी प्रकार का कैपिटेशन शुल्क लेना सख्त मना है।

पारदर्शिता: हर स्कूल को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस का पूरा विवरण देना होगा और हर भुगतान की विधिवत रसीद देनी होगी।

जांच के लिए बनी संयुक्त टीम

शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) ज्योति गौतम को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

निरीक्षण दल: क्षेत्रीय उप जिलाधिकारी (SDM), अपर नगर मजिस्ट्रेट (ACM) और राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी।

शिकायत कौन कर सकता है? छात्र, अभिभावक या पेरेंट-टीचर एसोसिएशन का कोई भी सदस्य फीस वृद्धि या अन्य अनियमितताओं की शिकायत कर सकता है।

कठोर दंड का प्रावधान

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में कोई स्कूल दोषी पाया जाता है, तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता (Recognition) तक रद्द की जा सकती है।

डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा विभाग के साथ समन्वय बनाकर निरंतर निगरानी रखें ताकि अभिभावकों का शोषण न हो सके।