I-PAC ने जिससे लिए करोड़ों का उधार, उस कंपनी का तो पता ही नहीं, जानिये चुनावी रणनीतिकारों के फंडिंग का खेल
News India Live, Digital Desk: चुनावी रणनीतियों की दुनिया में एक बड़ा नाम रखने वाली संस्था 'I-PAC' (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) इन दिनों कुछ गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला पैसे के लेनदेन और बड़ी वित्तीय गड़बड़ी (Irregularities) से जुड़ा है। हाल ही में एक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।
आखिर माजरा क्या है?
दरअसल, जांच के दौरान एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। I-PAC के खातों में करीब 13.5 करोड़ रुपये का एक लोन दिखाया गया है। नियमानुसार हर बड़ी ट्रांजेक्शन का हिसाब होना चाहिए, लेकिन जब इस लोन की गहराई से पड़ताल की गई, तो पता चला कि जिस कंपनी ने यह भारी-भरकम राशि दी है, उस कंपनी का असल में कोई वजूद ही नहीं है। यानी जिस कंपनी के नाम पर साढ़े तेरह करोड़ का लेनदेन हुआ, वह जमीन पर कहीं मिली ही नहीं।
फर्जीवाड़े का शक क्यों?
दस्तावेजों में जिस कंपनी को लेंडर (कर्ज देने वाला) बताया गया है, वह एड्रेस और रजिस्ट्रेशन के हिसाब से लापता मिली। अब सवाल यह उठता है कि अगर कंपनी है ही नहीं, तो करोड़ों का फंड आया कहाँ से? क्या यह पैसा किसी खास मकसद से 'घुमाकर' सिस्टम में डाला गया था? यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब हम देखते हैं कि I-PAC ने देश की कई बड़ी पार्टियों के लिए चुनाव मैनेज किए हैं।
बिना पते वाली कंपनी से करोड़ों का कर्ज?
सामान्य तौर पर अगर आप छोटा सा बैंक लोन भी लेते हैं, तो बैंक आपकी एड़ी-चोटी का जोर लगवा देता है। ऐसे में एक प्रोफेशनल संस्थान को इतनी बड़ी रकम एक ऐसी जगह से मिल जाना, जो मैप पर भी मौजूद नहीं है, कई शक पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि यह "शेल कंपनी" या मनी लॉन्ड्रिंग जैसा मामला हो सकता है, जिसकी बारीकी से जांच होना अभी बाकी है।
फिलहाल, इस खुलासे के बाद I-PAC की फंडिंग के स्रोतों पर उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर की पुरानी टीम या संस्थान की तरफ से इस पर क्या सफाई दी जाती है। एक तरफ जहां प्रशांत किशोर बिहार में 'जन सुराज' अभियान के जरिए व्यवस्था बदलने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके पुराने संगठन से जुड़ी ऐसी खबरें विवाद बढ़ा सकती हैं।