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April 19 2026 10:47 pm

कानपुर: टाइपिंग टेस्ट में फेल होने पर जिलाधिकारी का कड़ा एक्शन, 3 बाबू डिमोट होकर बने चपरासी

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कानपुर: कलेक्ट्रेट में कार्यरत तीन कनिष्ठ लिपिकों (Junior Clerks) के लिए एक विभागीय परीक्षा भारी पड़ गई। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के कड़े रुख के बाद, टाइपिंग परीक्षा पास न कर पाने के कारण इन तीनों कर्मचारियों को उनके पद से पदावनत (Demote) कर चपरासी बना दिया गया है। प्रशासनिक नियमों के तहत की गई इस कार्रवाई से कलेक्ट्रेट गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है।

मृतक आश्रित कोटे से हुई थी भर्ती

एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले प्रेमनाथ यादव, अमित यादव और नेहा श्रीवास्तव की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत कनिष्ठ लिपिक के पद पर की गई थी। सरकारी सेवा के नियमों के मुताबिक, इस पद पर स्थायी होने के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है।

दो बार मिला मौका, पर रहे असफल

नियमों के तहत इन तीनों कर्मचारियों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए एक साल का समय और दो अवसर दिए गए थे। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद ये तीनों अभ्यर्थी टाइपिंग की न्यूनतम निर्धारित गति (Speed) हासिल नहीं कर सके। लिपिकीय कार्यों के लिए आवश्यक टाइपिंग दक्षता न होने के कारण इन्हें पद के अयोग्य माना गया।

वेतन और प्रमोशन पर पड़ेगा सीधा असर

जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई का असर इन कर्मचारियों की आर्थिक और व्यावसायिक स्थिति पर भी पड़ेगा:

वेतन में कटौती: पद कम होने के कारण उनके मासिक वेतन में करीब छह हजार रुपये की कमी आएगी।

प्रोन्नति (Promotion): चपरासी पद पर आने के बाद अब उन्हें लिपिक पद तक दोबारा पहुँचने या अगले प्रमोशन के लिए लंबा इंतजार करना होगा।

भविष्य की चुनौतियां: यह कार्रवाई उन सभी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है जो अनिवार्य विभागीय अहर्ताएं पूरी नहीं कर पाते।

प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूर्णतः सेवा नियमावली के अनुरूप लिया गया है ताकि कार्यालय की कार्यक्षमता और गुणवत्ता बनी रहे।

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