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April 18 2026 01:02 pm

विंध्य एक्सप्रेस-वे: सर्वे एजेंसी न मिलने से अटका काम; 20 अप्रैल को मुख्यमंत्री करेंगे 'प्रायोरिटी प्रोजेक्ट' की समीक्षा

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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेस-वे का हब बनाने की दिशा में विंध्य एक्सप्रेस-वे (Vindhya Expressway) एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, लेकिन फिलहाल इसके सर्वे का कार्य जमीन अधिग्रहण की राह में बड़ी बाधा बना हुआ है। सर्वे के लिए उपयुक्त एजेंसी न मिल पाने के कारण प्रयागराज समेत अन्य संबंधित जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।

इस महत्वपूर्ण मुद्दे और परियोजना की सुस्त रफ्तार को लेकर 20 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

विंध्य एक्सप्रेस-वे का रूट और महत्व

मेरठ से प्रयागराज तक बन रहे गंगा एक्सप्रेस-वे को विंध्य एक्सप्रेस-वे से जोड़ने का प्रस्ताव है। यह जुड़ाव उत्तर प्रदेश के पूरब, पश्चिम और मध्यांचल को विंध्य क्षेत्र से सीधे कनेक्ट करेगा।

रूट मैप: यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेस-वे से शुरू होकर जौनपुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा।

कनेक्टिविटी: इसके बनने से सोनभद्र और चंदौली के लोग मात्र 8 से 9 घंटे में दिल्ली-एनसीआर पहुंच सकेंगे। साथ ही, मध्य प्रदेश (सिंगरौली, सीधी), झारखंड और छत्तीसगढ़ की राह भी आसान हो जाएगी।

क्यों अटका है काम?

राज्य परिवर्तन आयोग के निर्देशों के बावजूद प्रयागराज जनपद में प्रगति रिपोर्ट फिलहाल 'शून्य' है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

सर्वे एजेंसी का अभाव: लेआउट प्लान तैयार करने के लिए अभी तक कोई एजेंसी फाइनल नहीं हो सकी है। एजेंसी के बिना मिट्टी की जांच, एलाइनमेंट और सटीक रूट का निर्धारण संभव नहीं है।

जमीन अधिग्रहण में देरी: सर्वे पूरा न होने के कारण उन तहसीलों और गांवों की पहचान नहीं हो पाई है जिनकी जमीन ली जानी है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा द्वारा गठित कमेटी ने इस बाधा की पुष्टि की है।

यूपीडा की जिम्मेदारी: इस प्रोजेक्ट के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) को सौंपी गई है, जिसे 3 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री की 'प्रायोरिटी लिस्ट' में प्रोजेक्ट

विंध्य एक्सप्रेस-वे मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

समीक्षा बैठक: हर महीने के तीसरे सोमवार को मुख्यमंत्री स्वयं इसकी प्रगति की समीक्षा करते हैं।

हाई-लेवल जवाबदेही: इसके लिए 'स्टेटवाइड मॉनीटरिंग, इवैलुएशन एंड की-प्रोजेक्ट्स सुपरविजन' (SMART) सिस्टम के तहत जवाबदेही तय की गई है।

20 अप्रैल की बैठक: इस बैठक में एडीएम स्तर के अधिकारियों को भू-अध्याप्ति (Land Acquisition) की योजना और सर्वे एजेंसी की नियुक्ति पर ठोस रिपोर्ट पेश करनी होगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 20 अप्रैल की बैठक के बाद सर्वे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है, ताकि जल्द से जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके और विंध्य क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।