दीदी का इमोशनल कार्ड ,विपक्ष परेशान, क्या इस शॉर्ट फिल्म के सहारे फिर बंगाल जीत लेगीं ममता?

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News India Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां के चुनाव हमेशा से ही देश भर में चर्चा का विषय रहे हैं। वहां का माहौल, रैलियां और नारों का शोर अलग ही होता है। लेकिन, इस बार चुनावों की गहमागहमी के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने प्रचार का एक ऐसा तरीका अपनाया है, जो चीखने-चिल्लाने वाला नहीं, बल्कि सीधे दिल को छूने वाला है। आपने शायद सोशल मीडिया या खबरों में एक नाम सुना होगा 'लोक्खी एलो घोरे' (Lokkhi Elo Ghore)

आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर ये माजरा क्या है और क्यों इसकी इतनी चर्चा हो रही है।

क्या है 'लोक्खी एलो घोरे'?

बांग्ला भाषा में 'लोक्खी एलो घोरे' का मतलब होता है— 'घर आई लक्ष्मी'। दरअसल, यह एक शॉर्ट फिल्म (Short Film) है जिसे टीएमसी ने रिलीज किया है। लेकिन यह कोई आम फिल्म नहीं है। इसके जरिए ममता बनर्जी की सरकार अपनी सबसे लोकप्रिय योजना 'लक्ष्मी भंडार स्कीम' (Lakshmir Bhandar Scheme) की सफलता की कहानियां लोगों तक पहुंचा रही है।

हम सभी जानते हैं कि एक मिडिल क्लास या गरीब परिवार की महिला के लिए हर महीने 500 या 1000 रुपये की बचत भी कितनी मायने रखती है। कभी बच्चे की फीस, कभी दवाई तो कभी घर का छोटा-मोटा राशन—जब हाथ तंग होता है, तो यह छोटी सी रकम किसी बड़ी राहत से कम नहीं लगती। बस इसी एहसास को इस फिल्म में पिरोया गया है।

सिर्फ वोट नहीं, महिलाओं के आत्मसम्मान की बात

राजनीति अपनी जगह है, लेकिन पश्चिम बंगाल की महिलाओं के बीच ममता बनर्जी की इमेज एक 'दीदी' की है जो घर का दर्द समझती है। इस अभियान में किसी बड़े नेता के भाषण को नहीं दिखाया गया है, बल्कि आम महिलाओं की कहानियों को सामने रखा गया है।

इसमें दिखाया गया है कि कैसे जब सरकारी मदद का पैसा सीधे घर की महिला के बैंक खाते में आता है, तो उसे किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। वह खुद को आत्मनिर्भर महसूस करती है। यही वजह है कि बंगाल के गांवों और कस्बों में यह West Bengal welfare schemes वाली फिल्म लोगों, खासकर महिलाओं को भावुक कर रही है।

विपक्ष को मात देने का स्मार्ट तरीका

अक्सर चुनावों में पार्टियां एक-दूसरे पर कीचड़ उछालती हैं। लेकिन टीएमसी ने यहां अपनी स्ट्रैटेजी बदल दी है। उन्होंने विपक्ष को जवाब देने के लिए काम के सबूत (Testimonials) का सहारा लिया है। जब एक आम महिला कैमरे पर आकर कहती है कि "हाँ, मुझे फायदा मिला है," तो उसका असर किसी भी चुनावी भाषण से ज्यादा होता है। यह political campaign strategy अब धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और Google Discover जैसी जगहों पर भी खूब देखी जा रही है।

क्यों यह गेमचेंजर साबित हो सकता है?

बंगाल में 'लक्ष्मी' का मतलब सिर्फ धन की देवी नहीं है, वहां हर बेटी और बहू को घर की लक्ष्मी माना जाता है। इस योजना और फिल्म का नाम ऐसा रखा गया है जो बंगाली संस्कृति और भावनाओं से गहराई से जुड़ा है। चुनाव नजदीक हैं और महंगाई एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में यह याद दिलाना कि "हमने आपकी जेब का ख्याल रखा," एक मजबूत राजनीतिक दांव है।

अगर आप बंगाल की राजनीति पर नजर रखते हैं, तो समझ लीजिए कि 'लोक्खी एलो घोरे' सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि महिला वोट बैंक को साधने की एक बहुत ही सोच-समझ कर बनाई गई रणनीति है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस इमोशनल अपील पर मुहर लगाती है या नहीं।