Delhi Air Quality Update: दिल्ली की हवा हुई फिर 'जहरीली', AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंचा; मुंडका और आनंद विहार सबसे प्रदूषित
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। रविवार सुबह दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Air Quality) 'खराब' (Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 221 रहा, जो शनिवार के 197 (मध्यम श्रेणी) के मुकाबले अधिक चिंताजनक है।
इलाकों का हाल: मुंडका और आनंद विहार में सांस लेना मुश्किल
दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर औसत से काफी ऊपर पहुंच गया है। सबसे खराब स्थिति मुंडका और आनंद विहार जैसे क्षेत्रों में देखी गई है।
मुंडका: 275 (Poor)
आनंद विहार: 265 (Poor)
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम: 265 (Poor)
विवेक विहार: 252 (Poor)
रोहिणी: 250 (Poor)
अशोक विहार: 243 (Poor)
चांदनी चौक: 228 (Poor)
हालाँकि, 'एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम' ने अनुमान जताया है कि दिन चढ़ने के साथ हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हो सकता है और यह फिर से 'मध्यम' श्रेणी (करीब 180 AQI) तक आ सकती है।
AQI का गणित: जानें कब कितनी खतरनाक होती है हवा
CPCB के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
0-50 (Good): स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं।
51-100 (Satisfactory): संवेदनशील लोगों को मामूली परेशानी।
101-200 (Moderate): अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए सांस की समस्या।
201-300 (Poor): लंबे समय तक संपर्क में रहने पर ज्यादातर लोगों को सांस में तकलीफ।
301-400 (Very Poor): स्वस्थ लोगों को भी सांस की बीमारी का खतरा।
401-500 (Severe): सभी के लिए बेहद खतरनाक।
सियासी घमासान: डेटा की विश्वसनीयता पर AAP ने उठाए सवाल
दिल्ली की बिगड़ती हवा के साथ ही इस पर राजनीति भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली के प्रदूषण आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी सरकार (रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली) पर आरोप लगाया है कि वे नए मॉनिटरिंग स्टेशन शहर के हरे-भरे और खुले इलाकों में लगा रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा: "भाजपा सरकार का उद्देश्य दिल्ली की हवा साफ करना नहीं, बल्कि मॉनिटरिंग स्टेशनों को ग्रीन जोन में शिफ्ट करके कृत्रिम रूप से AQI रीडिंग को कम दिखाना है। यह प्रदूषण के खिलाफ ठोस कदम उठाने के बजाय सुधार का झूठा आभास पैदा करने की कोशिश है।"