डिफेंस मेगा डील भारत में बनेंगे रूस के सुखोई Su-57 स्टेल्थ फाइटर? HAL और UAC के बीच SJ-100 विमान को लेकर हुआ बड़ा समझौता

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News India Live, Digital Desk :  भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हैदराबाद में आयोजित 'विंग्स इंडिया 2026' (Wings India 2026) के दौरान रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच सुपरजेट-100 (SJ-100) विमान के उत्पादन को लेकर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 5वीं पीढ़ी के Su-57 'फेलन' (Felon) लड़ाकू विमानों के भारत में ही निर्माण की संभावनाओं को फिर से जीवित कर दिया है।

1. सुपरजेट-100 (SJ-100) समझौता: क्या है यह डील?

रूस का SJ-100 एक क्षेत्रीय यात्री विमान (Regional Jet) है। HAL के साथ हुए समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

लाइसेंस उत्पादन: HAL को भारत में SJ-100 विमान, उसके पुर्जे और स्पेयर पार्ट्स बनाने और बेचने का लाइसेंस मिलेगा।

सर्टिफिकेशन: HAL भारत में इस विमान के टाइप सर्टिफिकेशन और वैलिडेशन की प्रक्रिया में UAC की मदद करेगा।

सेल्फ-रिलायंस: यह विमान पूरी तरह रूसी कंपोनेंट्स (PD-8 इंजन) से लैस होगा, जिससे इस पर पश्चिमी प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा।

2. क्या भारत खरीदेगा Su-57 स्टेल्थ फाइटर?

UAC के CEO वादिम बदेखा के अनुसार, भारत और रूस Su-57E (एक्सपोर्ट वेरिएंट) के संयुक्त उत्पादन (Joint Production) के लिए 'एडवांस तकनीकी चर्चा' कर रहे हैं।

पहलूविवरण
प्रस्तावित योजनाभारत में पहले से मौजूद Su-30MKI की असेंबली लाइनों का उपयोग Su-57 बनाने के लिए करना।
तकनीक हस्तांतरणरूस ने पूर्ण 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर' और 'सोर्स कोड' देने की पेशकश की है।
IAF की जरूरतस्वदेशी AMCA (5वीं पीढ़ी के विमान) के तैयार होने तक Su-57 एक 'स्टॉप-गैप' समाधान हो सकता है।
संख्यारिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 2 से 3 स्क्वाड्रन (लगभग 36-40 विमान) पर विचार कर सकता है।

3. Su-57 की ताकत: क्यों खास है यह विमान?

Su-57 रूस का पहला ऑपरेशनल 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है, जिसे अमेरिकी F-22 और F-35 के जवाब में बनाया गया है।

सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति (Mach 1.6) बनाए रखने में सक्षम।

हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में ब्रह्मोस-NG जैसी मिसाइलों को फिट करने की चर्चा है।

रडार: N036 'बियल्का' AESA रडार सिस्टम, जो 60 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।

4. चुनौतियां और भारत का रुख

हालांकि रूस काफी उत्साहित है, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

AMCA प्रोजेक्ट: भारत का प्राथमिकता अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के विमान (AMCA) को विकसित करना है।

स्टेल्थ क्षमता: IAF पहले Su-57 की स्टेल्थ (राडार से बचने की क्षमता) और इंजन (AL-41F1) के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट होना चाहती है।

भू-राजनीति: रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते रक्षा संबंध इस डील को पेचीदा बना सकते हैं।

यदि यह डील परवान चढ़ती है, तो HAL के नासिक डिवीजन में इसका निर्माण शुरू हो सकता है, जहाँ वर्तमान में सुखोई-30 विमानों का ओवरहाल और उत्पादन होता है। जानकारों का मानना है कि 2026 में HAL और सुखोई के बीच साझेदारी की  30वीं वर्षगांठ पर कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

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