दलित मुस्लिम को भी मिले आरक्षण नीतीश के मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा दांव, बिहार की सियासत में भूचाल
News India Live, Digital Desk: बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी ने एक ऐसा बयान दिया है जो आने वाले दिनों में एनडीए और विपक्ष के बीच नई बहस का कारण बन सकता है। अशोक चौधरी ने वकालत की है कि उन मुसलमानों को भी अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और आरक्षण मिलना चाहिए, जो मूल रूप से दलित जातियों से धर्मांतरित हुए हैं या आज भी दलितों जैसी सामाजिक स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
अशोक चौधरी का तर्क: 'काम वही, तो पहचान अलग क्यों?'
एक निजी कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि समाज में कई ऐसे मुस्लिम समुदाय हैं जो सदियों से वही काम कर रहे हैं जो अनुसूचित जाति के लोग करते हैं। उन्होंने तर्क दिया:
जो लोग हिंदू धर्म में दलित थे और बाद में इस्लाम अपनाया, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
यदि उनकी जीवनशैली और पेशा आज भी दलित समाज जैसा ही है, तो उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने इस मुद्दे को 'समान अवसर' और 'सामाजिक न्याय' से जोड़कर पेश किया।
नीतीश कुमार की 'सोशल इंजीनियरिंग' का अगला कदम?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अशोक चौधरी का यह बयान नीतीश कुमार की 'पसमांदा मुस्लिम' राजनीति को और मजबूती देने की कोशिश हो सकता है। बिहार में दलितों, पिछड़ों और महादलितों को एकजुट करने के बाद अब जेडीयू की नजर उन मुस्लिम वर्गों पर है जो खुद को मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करते हैं।
विरोध और चुनौतियां
हालांकि, यह मांग इतनी आसान नहीं है। भारतीय संविधान के अनुसार, वर्तमान में अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा मुख्य रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों तक ही सीमित है। अशोक चौधरी की इस मांग पर भाजपा (BJP) का क्या रुख रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि भाजपा अक्सर धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध करती रही है।