असम कांग्रेस में महायुद्ध कौन हैं रकीबुल हुसैन? जिनकी वजह से प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने छोड़ दी कुर्सी

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News India Live, Digital Desk : असम की राजनीति में कांग्रेस के लिए यह समय 'अपनों से जंग' जैसा बन गया है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर सबको चौंका दिया है। सूत्रों की मानें तो बोरा, धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन के बढ़ते दखल और पार्टी के भीतर उनके 'एकतरफा' दबदबे से नाराज हैं।

कौन हैं रकीबुल हुसैन? (The Man in the Spotlight)

रकीबुल हुसैन असम कांग्रेस के वो कद्दावर नेता हैं जिन्हें राजनीति का 'चाणक्य' माना जाता है। उनके बारे में ये बातें उन्हें खास बनाती हैं:

धुबरी के 'दिग्गज' सांसद: 2024 के लोकसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने बदरुद्दीन अजमल (AIUDF) को 10 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराकर दिल्ली की राजनीति में धमाका किया था।

तरुण गोगोई के खासमखास: दिवंगत मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार में हुसैन कैबिनेट मंत्री थे और उन्हें गोगोई का सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था।

पार्टी पर पकड़: रकीबुल हुसैन की पकड़ जमीनी स्तर पर इतनी मजबूत है कि असम कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा उन्हें ही अपना असली नेता मानता है।

विवाद की असली जड़ क्या है?

भूपेन बोरा और रकीबुल हुसैन के बीच तनातनी की मुख्य वजह टिकट बंटवारा और संगठनात्मक वर्चस्व है।

उपचुनाव की जंग: असम की 5 सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन में रकीबुल हुसैन की राय को ज्यादा तरजीह दी गई, जिससे बोरा खुद को दरकिनार महसूस करने लगे।

वर्चस्व की लड़ाई: रकीबुल हुसैन के बेटे को समगुरी सीट से टिकट दिए जाने की चर्चा ने आग में घी का काम किया। बोरा खेमे का मानना है कि पार्टी में 'परिवारवाद' और 'एक व्यक्ति का राज' बढ़ रहा है।

भूपेन बोरा का इस्तीफा: रणनीति या मजबूरी?

भूपेन बोरा ने इस्तीफा देकर हाईकमान को कड़ा संदेश दिया है। जानकारों का कहना है कि यह बोरा का एक 'शक्ति प्रदर्शन' (Power Move) है ताकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस मामले में दखल दें और रकीबुल हुसैन के बढ़ते पर कतरे जा सकें।