Congress Internal Rift : राहुल गांधी ने अपनी जुबान से मुस्लिम शब्द क्यों हटाया? कांग्रेस के भीतर मची रार; ओवैसी की एंट्री ने बढ़ाई बेचैनी

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News India Live, Digital Desk: कांग्रेस पार्टी के गलियारों में इन दिनों एक नई बहस छिड़ गई है—"क्या राहुल गांधी जानबूझकर 'मुस्लिम' शब्द बोलने से बच रहे हैं?" राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के ही कुछ नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी अब अपनी रैलियों और बयानों में 'मुस्लिम' शब्द के बजाय 'अल्पसंख्यक' या 'संविधान' जैसे व्यापक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस की इस बदलती 'टर्मिनोलॉजी' ने पार्टी के भीतर एक बड़े वैचारिक मतभेद को जन्म दे दिया है।

राहुल की नई रणनीति: 'मुस्लिम' से 'संविधान' तक का सफर

राहुल गांधी के हालिया भाषणों पर गौर करें तो वे सीधे तौर पर किसी एक धर्म का नाम लेने के बजाय 'बहुजन', 'दलित' और 'पिछड़ों' की बात अधिक कर रहे हैं।

सॉफ्ट हिंदुत्व का साया: पार्टी के कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि सीधे 'मुस्लिम' शब्द का उपयोग करने से बीजेपी को 'तुष्टीकरण' का आरोप लगाने और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का मौका मिल जाता है।

रणनीतिक बदलाव: राहुल अब अल्पसंख्यकों के मुद्दों को 'संवैधानिक अधिकारों' और 'न्याय' के चश्मे से पेश कर रहे हैं, ताकि इसे धार्मिक रंग मिलने से बचाया जा सके।

कांग्रेस के भीतर नाराजगी: "क्या हम अपना आधार खो रहे हैं?"

राहुल के इस रवैये से कांग्रेस के कुछ मुस्लिम नेता और कैडर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

गुटतर्क और चिंता
पुराना गुट (Old Guard)इनका मानना है कि कांग्रेस को खुलकर अल्पसंख्यकों के हक में बोलना चाहिए, जैसा वह पहले करती थी।
नया गुट (Strategists)इनका दावा है कि 'मुस्लिम' शब्द से दूरी बनाना बीजेपी के चक्रव्यूह को काटने के लिए जरूरी है।
मुस्लिम नेतृत्वनेताओं को डर है कि कांग्रेस की इस 'खामोशी' का सीधा फायदा असदुद्दीन ओवैसी को होगा।

ओवैसी का फैक्टर: 'मुस्लिम वोटों' की नई दावेदारी

जहाँ राहुल गांधी शब्दों के चयन में सावधानी बरत रहे हैं, वहीं असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) इस खाली जगह को भरने के लिए आक्रामक रुख अपना रहे हैं।

सीधा संवाद: ओवैसी खुलेआम राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं कि वे मुसलमानों का वोट तो चाहते हैं लेकिन उनका नाम लेने से डरते हैं।

सेंधमारी का डर: बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। अगर कांग्रेस का 'मुस्लिम' बेस खिसका, तो कई राज्यों में उसका समीकरण बिगड़ सकता है।

 2026 की चुनावी बिसात

कांग्रेस के इस आंतरिक द्वंद्व का असर 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय है। पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ उसे खुद को 'हिंदू विरोधी' होने के ठप्पे से बचाना है, और दूसरी तरफ अपने सबसे वफादार वोट बैंक (मुस्लिम समुदाय) को ओवैसी की ओर जाने से रोकना है। फिलहाल, राहुल गांधी 'जाति जनगणना' और 'संविधान बचाओ' के जरिए एक ऐसा 'अंब्रेला नैरेटिव' तैयार कर रहे हैं, जिसमें सभी वर्गों को शामिल किया जा सके, बिना किसी को अलग से चिह्नित किए।

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