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March 28 2026 12:29 pm

ईरान युद्ध में पाकिस्तान की एंट्री से भड़की कांग्रेस, मोदी सरकार पर साधा निशाना बताया कूटनीतिक हार

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण युद्ध के बीच भारत की सियासत में 'कूटनीति' को लेकर घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का दावा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक मध्यस्थ (Intermediary) की भूमिका निभा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे 'स्वयंभू विश्वगुरु' के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका करार देते हुए कहा है कि भारत इस महत्वपूर्ण भूमिका से पूरी तरह बाहर हो गया है।

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बदला समीकरण?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एक साल पहले तक पाकिस्तान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ा था, लेकिन अब उसकी कूटनीतिक सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की सैन्य सफलता का जिक्र करते हुए अफसोस जताया कि सैन्य जीत के बावजूद मोदी सरकार अपनी कूटनीतिक बढ़त बरकरार रखने में विफल रही है। कांग्रेस के अनुसार, पाकिस्तान का नैरेटिव मैनेजमेंट अब मोदी सरकार से बेहतर साबित हो रहा है।

पीएम मोदी की इजरायल यात्रा पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा को 'विनाशकारी चुनाव' करार दिया है। विपक्षी पार्टी का आरोप है कि पीएम मोदी की यह यात्रा अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, जिससे भारत ने एक मध्यस्थ के रूप में अपनी तटस्थ स्थिति खो दी। कांग्रेस के मुताबिक, भारत के पास मौका था कि वह इस बड़े संकट को टालने के लिए बीच-बचाव करता, लेकिन सरकार के 'एकतरफा' झुकाव ने पाकिस्तान जैसे देशों को मंच दे दिया है।

ट्रंप और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई टेंशन

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ती 'दोस्ती' भारत के लिए शुभ संकेत नहीं है। कांग्रेस ने दावा किया कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी और ट्रंप के साथ उनकी करीबियां दर्शाती हैं कि अमेरिका अब दक्षिण एशिया में पाकिस्तान को फिर से तरजीह दे रहा है। जयराम रमेश ने इसे 'हगलोमेसी' (गले मिलने वाली कूटनीति) की विफलता बताया है।

भारत की चुप्पी और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब पूरी दुनिया में भारत को एक 'ग्लोबल प्लेयर' के रूप में पेश किया जा रहा है, तब ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत मौन क्यों है? पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान इस क्षेत्र में शांतिदूत बनकर उभरता है, तो यह आने वाले समय में भारत की सामरिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। वहीं, सरकार की ओर से फिलहाल इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी रणनीति के तहत 'वेट एंड वॉच' (इंतज़ार करो और देखो) की नीति अपना रहा है।