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March 26 2026 10:28 am

बिना परिसीमन लागू होगा महिला आरक्षण मोदी सरकार ने खोजा नया फॉर्मूला, अब 2011 की जनगणना बनेगी आधार

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News India Live, Digital Desk: केंद्र की मोदी सरकार ने देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के लिए एक 'मास्टर प्लान' तैयार कर लिया है। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर अब तक संशय बना हुआ था कि यह परिसीमन के बाद ही लागू होगा, लेकिन ताजा कूटनीतिक हलचल बताती है कि सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही प्रभावी बनाने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक बड़ा संवैधानिक संशोधन लाने जा रही है, जिसमें परिसीमन (Delimitation) की शर्त को हटाकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार बनाया जा सकता है।

2029 में दिखेगा 'नारी शक्ति' का जलवा: बदला जाएगा कानून

मूल कानून के अनुसार, महिला आरक्षण को नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था, जिसमें 2030 के बाद तक की देरी होने की संभावना थी। विपक्ष के कड़े तेवरों और जल्द लागू करने की मांग के बीच, सरकार अब इस प्रावधान को 'डिलिंक' (Delink) करने पर विचार कर रही है। सूत्रों की मानें तो आगामी सत्र में एक नया संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है, जो बिना किसी नए परिसीमन के सीधे 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का रास्ता साफ कर देगा।

नया फॉर्मूला: 816 होंगी लोकसभा सीटें, 273 पर सिर्फ महिलाएं!

इस नए फॉर्मूले के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में भी भारी इजाफा होने का अनुमान है। यदि 2011 की जनगणना को आधार मानकर सीटों का पुनर्गठन किया जाता है, तो लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़कर 816 तक पहुंच सकती है। इस नए गणित के हिसाब से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने पर संसद में 273 महिला सांसद चुनकर आएंगी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महिलाओं की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक भागीदारी होगी।

राज्यों की विधानसभाओं में भी मचेगी खलबली

यह कानून सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सभी विधानसभाओं पर भी समान रूप से लागू होगा। उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में महिला विधायकों की संख्या में तीन गुना तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। राजनीतिक दलों के भीतर भी अब इस बदलाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि कई दिग्गज नेताओं को अपनी पारंपरिक सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है और वहां महिला उम्मीदवारों को उतारना अनिवार्य होगा।

विपक्ष और सहयोगियों से रायशुमारी शुरू

सरकार इस महत्वपूर्ण संशोधन को पारित कराने के लिए आम सहमति बनाने में जुट गई है। केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी दलों और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ अनौपचारिक चर्चा शुरू कर दी है। चूंकि आरक्षण को जनगणना से अलग करने की मांग विपक्ष पहले ही कर चुका है, इसलिए सरकार को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक कदम को सदन में भारी समर्थन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दांव सफल रहा, तो 2029 का चुनाव पूरी तरह से 'महिला केंद्रित' मुद्दों पर लड़ा जाएगा।