Chitragupta Katha : भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं इस बात को सच साबित करते हैं ये देवता

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News India Live, Digital Desk : हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि "जैसे कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा।" अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि ऊपर वाला सब देख रहा है और वहां एक-एक पाई का हिसाब होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी बड़ी दुनिया में, हर एक इंसान के पल-पल का हिसाब आखिर रखता कौन है?

हम आम तौर पर मृत्यु के देवता यमराज (Yamraj) से डरते हैं, लेकिन पौराणिक कथाओं में एक ऐसे देवता का भी ज़िक्र है, जिनके बिना यमराज का काम भी अधूरा है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं चित्रगुप्त महाराज की। आइए, आज आपको थोड़ी आसान भाषा में समझाते हैं कि हमारी पौराणिक कहानियों में इनकी क्या भूमिका बताई गई है।

यमराज के 'पर्सनल अकाउंटेंट' और सलाहकार

हम सब जानते हैं कि यमराज को 'सूर्यपुत्र' और मृत्यु का देवता कहा जाता है। जब किसी की जीवन लीला समाप्त होती है, तो उसे यमलोक जाना पड़ता है। लेकिन वहाँ हज़ारों-लाखों आत्माओं की भीड़ में यह फैसला कैसे हो कि कौन स्वर्ग का हक़दार है और कौन नर्क का?

बस यहीं पर भूमिका आती है भगवान चित्रगुप्त की। शास्त्रों के मुताबिक, चित्रगुप्त जी यमराज के प्रमुख सहयोगी (Associate) हैं। आप उन्हें मॉडर्न ज़माने के हिसाब से 'डिवाइन रिकॉर्ड कीपर' या यमलोक का मुनीम भी कह सकते हैं। उनके पास एक विशाल बही-खाता (Ledger) होता है, जिसमें हर जीव के पाप और पुण्य का सटीक हिसाब लिखा होता है।

ब्रह्मा जी की काया और 'गुप्त' राज़

चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। माना जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने यह महसूस किया कि कर्मों का हिसाब रखने के लिए किसी बुद्धिमान और सजग देव की ज़रूरत है। तब उनकी काया (शरीर/मन) से एक तेजवान पुरुष प्रकट हुआ। चूंकि वो ब्रह्मा जी के चित्त (मन) में गुप्त रूप से निवास करते थे और रहस्यमयी (गुप्त) तरीक़े से सब जान लेते थे, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।

क्यों अहम है इनकी कलम?

कहते हैं कि इंसान दुनिया से झूठ बोल सकता है, पुलिस से बच सकता है, लेकिन चित्रगुप्त की कलम से नहीं बच सकता। यमराज जब किसी आत्मा को सज़ा या ईनाम देते हैं, तो उससे पहले वो चित्रगुप्त जी से ही पूरी रिपोर्ट मांगते हैं। उनकी "आकाशीय किताब" (Agra Sandhani) में दर्ज हर एंट्री के आधार पर ही हमारा अगला जन्म या मोक्ष तय होता है।

तो दोस्तों, अगली बार जब भी मन में कोई गलत विचार आए या कुछ गलत करने का खयाल आए, तो बस एक बार यह याद कर लीजियेगा कि कोई है जो बिना सीसीटीवी कैमरा लगाए भी आपको देख रहा है और नोट कर रहा है। चित्रगुप्त जी की यह कहानी हमें यही सिखाती है कि हम ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलें।