लापरवाही पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द होने का मंडराया बड़ा खतरा

लापरवाही पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द होने का मंडराया बड़ा खतरा

देश के प्रशासनिक तंत्र, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण अभियानों और गरीब नागरिकों के अधिकारों से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और पश्चिम बंगाल से सामने आ रही है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर (SIR) की प्रशासनिक प्रक्रिया किस तरह आम, गरीब और बेबस लोगों के जीवन पर एक बहुत बड़ा वज्रपात बन सकती है, इसका जीता-जागता और भयावह उदाहरण इस समय रायपुर के एक डिटेंशन सेंटर में कैद पश्चिम बंगाल के चार मजदूरों की दुर्दशा से मिल रहा है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से ताल्लुक रखने वाले इन चार गरीब प्रवासी मजदूरों को केवल इसलिए अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दिन रायपुर के डिटेंशन सेंटर में बिताने पड़ रहे हैं क्योंकि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक चूक या दस्तावेजों की कमी के चलते वोटर लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया था। इस अमानवीय और हैरान कर देने वाले मामले ने देश भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और प्रशासनिक जानकारों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके खिलाफ अब पीड़ित परिवारों ने न्याय की उम्मीद में कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला: कैसे मुर्शिदाबाद के इन गरीब मजदूरों की जिंदगी एसआईआर प्रक्रिया की भेंट चढ़ गई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुर्शिदाबाद के रहने वाले ये चारों गरीब मजदूर अपनी आजीविका चलाने और अपने परिवार का पेट पालने के लिए पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ के रायपुर और आसपास के इलाकों में मजदूरी का काम कर रहे थे। इसी दौरान जब चुनाव आयोग या संबंधित प्रशासनिक तंत्र द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया चलाई जा रही थी, तब कागजी प्रक्रियाओं में कथित तौर पर नाम और पते के सत्यापन में हुई गड़बड़ी के कारण इन मजदूरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। आरोप है कि जब स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों ने सत्यापन की कार्रवाई की, तो वे अपनी नागरिकता या पुश्तैनी पते से जुड़े उन तमाम भारी-भरकम दस्तावेजों को तुरंत पेश नहीं कर सके जिसकी इस तरह की जटिल प्रक्रियाओं में मांग की जाती है। इसी का परिणाम यह हुआ कि प्रशासनिक मशीनरी ने बिना किसी संवेदनशीलता के इन गरीब और निरक्षर मजदूरों को विदेशी या संदिग्ध मानकर रायपुर के डिटेंशन सेंटर में लाकर बंद कर दिया, जहां वे पिछले कई हफ्तों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

डिटेंशन सेंटर की बदहाली और भुखमरी जैसी स्थिति: अपनों की तलाश में भटक रहे बेबस परिवार और कानूनी लड़ाई

रायपुर के जिस डिटेंशन सेंटर में इन चारों बदनसीब मजदूरों को रखा गया है, वहां की स्थितियां मानवाधिकारों के लिहाज से बेहद चिंताजनक बताई जा रही हैं। पश्चिम बंगाल में रह रहे इन मजदूरों के बुजुर्ग माता-पिता, पत्नियां और छोटे-छोटे बच्चे दाने-दाने को मोहताज हो चुके हैं क्योंकि घर का इकलौता कमाने वाला शख्स हजारों किलोमीटर दूर एक चारदीवारी के पीछे कैद है। परिवारों के पास इतने संसाधन भी नहीं थे कि वे छत्तीसगढ़ आकर कानूनी लड़ाई लड़ सकें, लेकिन स्थानीय मानवाधिकार संगठनों और कुछ प्रबुद्ध वकीलों की मदद से आखिरकार उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर कर दी है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों का यह तर्क है कि केवल प्रशासनिक स्तर पर वोटर लिस्ट से नाम कट जाने या मामूली दस्तावेजों के अभाव में किसी भी भारतीय नागरिक को इस प्रकार अनिश्चितकाल के लिए डिटेंशन सेंटर में कैद रखना मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है और यह देश के संविधान द्वारा दिए गए जीने के अधिकार पर सीधा प्रहार है।

एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल: भविष्य में ऐसे मामलों से कैसे निपटेगा प्रशासन

इस सनसनीखेज और संवेदनशील मामले ने इस बात पर फिर से गहरी बहस छेड़ दी है कि क्या देश में चलने वाले विशेष पुनरीक्षण या डिटेंशन से जुड़े अभियान जमीनी स्तर पर बिना किसी मानवीय संवेदना के संचालित किए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जो लोग दो वक्त की रोटी कमाने के लिए अपने घर-गांव से दूर दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं, उनके पास अक्सर वे तमाम डिजिटल और कागजी दस्तावेज नहीं होते जिनकी मांग बड़े शहरों के प्रशासनिक अधिकारी करते हैं। यदि केवल मतदाता सूची से नाम हटने मात्र से किसी गरीब को विदेशी या घुसपैठिया मानकर जेल या डिटेंशन सेंटर में ठूंस दिया जाएगा, तो यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा धब्बा है। अब सभी की निगाहें कलकत्ता उच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले में क्या निर्देश देती है और क्या मुर्शिदाबाद के इन बेकसूर मजदूरों को सम्मान के साथ रिहाई मिल पाती है या नहीं।