हेलीकॉप्टर बीमा दावा 4 साल तक लटकाया और फिर कर दिया खारिज
देश के प्रशासनिक और सरकारी कामकाज में मनमानी करने वाली निजी कंपनियों पर किस तरह से शिकंजा कसा जाता है, इसका एक बहुत बड़ा और कड़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ शासन की ओर से सामने आया है। राज्य सरकार ने अपनी एक महत्वपूर्ण संपत्ति यानी आधिकारिक हेलीकॉप्टर से जुड़े बीमा दावे (Insurance Claim) को बिना किसी ठोस और न्यायसंगत कारण के लगातार चार साल तक लटकाए रखने और अंत में उसे पूरी तरह से खारिज करने वाली एक प्रमुख बीमा कंपनी के खिलाफ बहुत ही सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी जिद्द और लापरवाही के लिए कुख्यात हो चुकी इस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अगले तीन साल की अवधि के लिए राज्य में किसी भी प्रकार के सरकारी अनुबंध या कार्यों से पूरी तरह से ब्लैकलिस्ट (Blacklisted) कर दिया है। सरकार के इस सख्त और कड़े तेवर से पूरे कॉर्पोरेट और बीमा जगत में हड़कंप मच गया है, और यह संदेश साफ हो गया है कि सरकारी खजाने या परिसंपत्तियों के दावों के साथ खिलवाड़ करने वाली कंपनियों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है पूरा मामला: कैसे चार साल तक फाइलों में उलझा रहा हेलीकॉप्टर का बीमा दावा और क्यों हुई तकरार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ सरकार के स्वामित्व वाले एक आधिकारिक हेलीकॉप्टर को लेकर कुछ तकनीकी या दुर्घटना संबंधी नुकसान हुआ था, जिसके बाद नियमानुसार उसकी मरम्मत और वित्तीय हर्जाने की भरपाई के लिए बीमा कंपनी के पास विधिवत क्लेम फाइल किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत सरकार की ओर से सभी आवश्यक दस्तावेज, सर्वे रिपोर्ट्स और तकनीकी आकलन समय पर जमा करा दिए गए थे, लेकिन बीमा कंपनी के अधिकारियों ने या तो जानबूझकर या अपनी सुस्त कार्यप्रणाली के चलते इस फाइल को एक विभाग से दूसरे विभाग में चार साल तक बिना किसी नतीजे के लटकाए रखा। इतने लंबे समय तक जब राज्य सरकार और संबंधित महकमे ने बार-बार फॉलोअप किया, तो कंपनी ने अंततः यह कहते हुए उस बड़े दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि यह मामला उनकी पॉलिसी की शर्तों के दायरे में पूरी तरह से फिट नहीं बैठता है। बीमा कंपनी के इस रवैये को शासन ने प्रशासनिक विशेषाधिकार और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन माना, जिसके बाद यह पूरा विवाद उच्च स्तर पर पहुंच गया और सरकार ने इस मनमानी के खिलाफ एक कड़ा निर्णय लेने की ठान ली।
छत्तीसगढ़ शासन का कड़ा प्रशासनिक रुख: तीन साल का प्रतिबंध लगाकर दिया दो टूक संदेश
जब यह मामला उच्चाधिकारियों और मंत्रिमंडल के संज्ञान में आया, तो उन्होंने पाया कि बीमा कंपनी ने न केवल सार्वजनिक धन और सरकारी संपत्ति के प्रति लापरवाही बरती है, बल्कि शासन के साथ पत्राचार के दौरान भी गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया है। इसके तुरंत बाद वित्त विभाग और विमानन विभाग (Aviation Department) की संयुक्त संस्तुति पर कार्रवाई करते हुए उस बीमा कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और संतोषजनक जवाब न मिलने पर उसे छत्तीसगढ़ शासन के सभी विभागों, उपक्रमों और निगमों में आगामी तीन वर्षों के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित यानी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इस आदेश के तहत अब यह कंपनी भविष्य में न तो किसी सरकारी संपत्ति का बीमा कर सकेगी और न ही किसी प्रशासनिक अनुबंध का हिस्सा बन पाएगी। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के सख्त कदम उठाने से अन्य निजी और बीमा कंपनियों को एक कड़ा संदेश मिलेगा कि वे सरकारी दावों को हल्के में लेने की भूल कभी न करें।
प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सबक: भविष्य के लिए तैयार हुआ कड़ा फ्रेमवर्क
सरकारी तंत्र में अक्सर यह देखा जाता है कि बीमा दावे या कानूनी प्रक्रियाएं लालफीताशाही (Red Tapism) और कंपनियों की टालमटोल नीति के कारण सालों-साल फाइलों में कैद रहती हैं, जिससे अंततः जनता के पैसे का नुकसान होता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बड़ी से बड़ी और दिग्गज कंपनियों को भी उनकी मनमानी के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है। इस पूरी कार्रवाई के बाद अब राज्य के अन्य विभागों में भी इस बात की समीक्षा की जा रही है कि क्या उनकी फाइलें भी किसी निजी कंपनी के पास इसी तरह लंबित पड़ी हैं या नहीं। छत्तीसगढ़ की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले की चौतरफा सराहना हो रही है, क्योंकि यह साफ तौर पर यह साबित करता है कि राज्य के हितों और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के मामले में सरकार किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।