कर्नाटक का चेन्नाकेशव मंदिर जहां पत्थरों में भी जान फूँक दी गई आखिर क्या है इसके अदभुत शिल्प का राज?

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News India Live, Digital Desk : जब भी भारत के गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य कला की बात होती है, तो अक्सर हम बड़े-बड़े महलों की चर्चा करते हैं। लेकिन कर्नाटक के हासन जिले के बेलूर में एक ऐसी जगह है, जो महलों से भी कहीं ज्यादा भव्य है 'श्री चेन्नाकेशव स्वामी मंदिर'। अगर आप कला प्रेमी हैं, तो यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियाँ आपसे बातें करेंगी।

इतिहास की एक सुनहरी झलक
ये मंदिर आज से लगभग 900 साल पहले यानी 1117 ईस्वी में होयसल राजवंश के महान राजा विष्णुवर्धन ने बनवाया था। कहा जाता है कि उन्होंने इसे अपनी चोलों पर मिली जीत की खुशी में और भगवान विष्णु को समर्पित करने के लिए बनाया था। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में 'चेन्नाकेशव' यानी 'सुंदर केशव' (विष्णु) की 6 फीट ऊँची मूर्ति स्थापित है, जिसकी चमक आज भी वैसी ही बनी हुई है।

वो शिल्प जो दुनिया को सोच में डाल दे
आज की मशीनी दुनिया में जहाँ बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें कुछ सालों में ही दम तोड़ देती हैं, वहां यह मंदिर बिना किसी सीमेंट या आधुनिक तकनीक के 9 शताब्दियों से मजबूती से खड़ा है। इसे 'सोप स्टोन' (सलेटी पत्थर) से बनाया गया है, जो नक्काशी के लिए बहुत मुलायम होता है, लेकिन समय के साथ कठोर हो जाता है।

मंदिर की बाहरी दीवारों पर हजारों की संख्या में हाथी, घोड़े और नर्तकियों की मूर्तियाँ हैं। मजेदार बात ये है कि इतनी सारी मूर्तियों में से कोई भी एक जैसी नहीं है। यहाँ की 'शिलाबालिकाओं' (Darpan Sundaris) की नक्काशी इतनी बारीक है कि उनके गहने, कपड़ों की सिलवटें और आँखों की पुतलियों तक को बारीकी से देखा जा सकता है। कुछ मूर्तियों के बीच तो सुई डालने की भी जगह नहीं है!

यूनेस्को (UNESCO) का गौरव
यह सिर्फ भारतीयों की पसंद नहीं है, बल्कि दुनिया ने भी इसकी खूबसूरती को माना है। हाल ही में होयसल राजवंश के मंदिरों को यूनेस्को की 'विश्व विरासत सूची' में शामिल किया गया है, जिसमें चेन्नाकेशव मंदिर प्रमुख है। यागाछी नदी के किनारे बसा यह मंदिर शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है।

आपको क्यों जाना चाहिए?
अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी नहीं भी है, तो भी इस मंदिर की बनावट आपका दिल जीत लेगी। जब आप इसके ऊँचे खंभों के नीचे खड़े होते हैं, तो समझ आता है कि हमारे पूर्वज कितने बड़े इंजीनियर और कलाकार थे। हर स्तंभ (Pillar) अपने आप में एक अनोखी कहानी कहता है।

अगर आप शांति, कला और अध्यात्म का अनूठा मेल देखना चाहते हैं, तो एक बार कर्नाटक के इस 'पत्थर के स्वर्ग' को अपनी यात्रा की लिस्ट में जरूर शामिल करें।