ChatGPT की छुट्टी? पाकिस्तान ने लॉन्च किया अपना AI Qalb, दावा- उर्दू का सबसे बड़ा जादूगर

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News India Live, Digital Desk : पूरी दुनिया में अमेरिकी कंपनियों का ही डंका बज रहा है, चाहे वो ओपनएआई (OpenAI) हो या गूगल। लेकिन इन सब मॉडल्स में एक कमी हमेशा खलती थी वो है हमारी देसी भाषाओं और क्षेत्रीय जुबां की समझ। वो काम तो कर देते हैं, लेकिन उनमें वो 'लोकल' फीलिंग और सटीकता नहीं आ पाती।

इसी कमी को भरने के लिए पाकिस्तान से एक बड़ी खबर आई है। वहां एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल लॉन्च किया गया है, जिसका नाम है 'Qalb' (क़ल्ब)।

सुनने में यह नाम थोड़ा शायराना लगता है, है न? उर्दू में 'क़ल्ब' का मतलब होता हैदिल'। और दावा किया जा रहा है कि यह मॉडल उर्दू भाषा को समझने के मामले में अब तक का सबसे स्मार्ट सिस्टम है।

आखिर 'Qalb' में ऐसा क्या खास है?
देखिए, ChatGPT या Meta के AI मॉडल अंग्रेजी में तो शानदार हैं, लेकिन जब बात उर्दू, अरबी या फारसी लिपि (Script) की आती है, तो कई बार वो अटक जाते हैं या गलत संदर्भ (Context) दे देते हैं। 'क़ल्ब' को बनाने वालों का कहना है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा 'उर्दू लार्ज लैंग्वेज मॉडल' (LLM) है।

इसे इस तरह ट्रेन किया गया है कि यह न सिर्फ उर्दू व्याकरण को समझता है, बल्कि वहां की संस्कृति, इतिहास और बोलने के लहजे को भी बखूबी पकड़ता है। यानी अगर आप इससे कोई गज़ल लिखने को कहेंगे या किसी कानूनी दस्तावेज का मतलब पूछेंगे, तो यह अंग्रेजी AI के मुकाबले ज्यादा अपनापन और सही जवाब देगा।

ChatGPT से कितनी बड़ी टक्कर?
अब सबसे बड़ा सवाल— क्या यह ChatGPT को हरा पाएगा?
सच कहूं तो, 'हराना' शायद सही शब्द नहीं होगा। ChatGPT एक 'जनरलिस्ट' है (जिसे सब कुछ थोड़ा-थोड़ा आता है), जबकि Qalb एक 'स्पेशलिस्ट' बनने की कोशिश कर रहा है (जिसे उर्दू और स्थानीय जरूरतों की गहरी समझ है)।

टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि ग्लोबल लेवल पर टक्कर देना अभी बहुत दूर की बात है, लेकिन दक्षिण एशिया और उर्दू/अरबी बोलने वाले देशों के लिए यह बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। यह स्थानीय बिजनेस, बैंकिंग और हेल्थकेयर सेक्टर में भाषा की बाधा को तोड़ सकता है।

क्या यह सफल होगा?
यह देखना अभी बाकी है। किसी भी AI मॉडल की असली ताकत उसका 'डेटा' और उसकी 'स्पीड' होती है। अगर 'क़ल्ब' सही तरीके से काम करता है, तो यह साबित होगा कि अब तकनीक सिर्फ पश्चिमी देशों की जागीर नहीं रही।

यह कदम उन सभी लोगों के लिए एक उम्मीद है जो अपनी मातृभाषा में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहते हैं। चाहे सरहद के उस पार हो या इस पार, अपनी भाषा को बढ़ावा देना हमेशा एक अच्छी पहल मानी जाती है।