कप्तान गिल और कोच गंभीर में पहले ही दिन मतभेद? पिच को लेकर छिड़ी नई बहस
News India Live, Digital Desk: भारतीय टेस्ट क्रिकेट एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जिसमें कप्तान की कमान युवा शुभमन गिल के हाथों में है और हेड कोच की कुर्सी पर आक्रामक सोच वाले गौतम गंभीर बैठे हैं। नई जोड़ी, नई उम्मीदें... लेकिन क्या टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत, यानी घरेलू पिचों को लेकर कप्तान और कोच की सोच एक है? हालिया बयानों और रिपोर्टों से जो संकेत मिल रहे हैं, वे एक दिलचस्प रणनीतिक बहस की ओर इशारा कर रहे हैं।
शुभमन गिल चाहते हैं 'संतुलित पिच'
कप्तान शुभमन गिल, जो खुद एक टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज हैं, ने टेस्ट क्रिकेट के लिए 'संतुलित पिचों' की वकालत की है।
- क्या है गिल का नजरिया? गिल का मानना है कि टेस्ट मैच का असली रोमांच तभी है जब पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों, दोनों के लिए समान अवसर हों। वह ऐसी पिचें चाहते हैं जो पांच दिनों तक चले, जहां तेज गेंदबाजों को भी मदद मिले और स्पिनर्स खेल के आगे बढ़ने के साथ-साथ असरदार साबित हों। एक संतुलित पिच टीम की हर तरह की काबिलियत का परीक्षण करती है, न कि सिर्फ स्पिन खेलने की क्षमता का।
गौतम गंभीर हैं 'रैंक टर्नर' के पक्षधर
वहीं दूसरी ओर, हेड कोच गौतम गंभीर की सोच हमेशा से ही घरेलू परिस्थितियों का अधिकतम फायदा उठाने की रही है।
- क्या है गंभीर की रणनीति? गंभीर को 'रैंक टर्नर' यानी पहले दिन से ही घूमने वाली पिचों का समर्थक माना जाता है। उनका मानना है कि जब आपके पास रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल जैसे विश्व स्तरीय स्पिनर्स हों, तो आपको अपनी सबसे बड़ी ताकत का इस्तेमाल करके विपक्ष को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना चाहिए। यह एक आक्रामक रणनीति है, जिसका लक्ष्य तीन-चार दिन में ही मैच खत्म करके सीरीज जीतना होता है।
क्या यह सोच में टकराव है?
एक तरफ कप्तान है जो एक 'फेयर कॉन्टेस्ट' चाहता है, और दूसरी तरफ कोच है जो 'नतीजा' चाहता है। यह पहली नजर में सोच का टकराव लग सकता है।
- संतुलित पिच: यह टीम के आत्मविश्वास को दर्शाता है कि हम किसी भी तरह के विकेट पर पांच दिन खेलकर मैच जीतने की क्षमता रखते हैं।
- रैंक टर्नर: यह एक निर्मम और व्यावहारिक दृष्टिकोण है, जो कहता है कि घरेलू मैदान पर कोई मुरव्वत नहीं होनी चाहिए और जीत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा?
यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम की नई लीडरशिप किस रास्ते पर चलती है। क्या शुभमन गिल के शांत स्वभाव और संतुलित सोच का असर पिचों पर दिखेगा, या गौतम गंभीर की आक्रामक रणनीति हावी होगी? पिच तैयार करने का अंतिम निर्णय कप्तान, कोच और स्थानीय क्यूरेटर की आपसी सहमति से होता है।
यह टकराव नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सफल रणनीतियों के बीच का मंथन हो सकता है। हो सकता है कि दोनों मिलकर एक बीच का रास्ता निकालें, जहां पिच स्पिनरों के लिए मददगार तो हो, लेकिन इतनी भी नहीं कि मैच दो-तीन दिन में ही एकतरफा हो जाए। भारतीय क्रिकेट का भविष्य इस नई जोड़ी के तालमेल पर बहुत कुछ निर्भर करेगा, और इसकी पहली परीक्षा पिचों की तैयारी से ही शुरू होगी।