मकर संक्रांति पर ये 7 गलतियां कहीं अनजाने में आप भी तो नहीं खो रहे अपना सौभाग्य?

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News India Live, Digital Desk : त्योहारों का मतलब सिर्फ खुशियां मनाना ही नहीं, बल्कि खुद को अनुशासन में रखना भी होता है। मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से अनुशासन और संयम का दिन है। इस साल 14 जनवरी 2026 को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर हमें अपनी दिनचर्या में कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए।

1. सात्विक भोजन ही है आधार
मकर संक्रांति के दिन तामसिक भोजन यानी मांस, मछली, लहसुन और प्याज के सेवन से बचना चाहिए। यह दिन पवित्रता का है, इसलिए सादा और सुपाच्य भोजन (विशेष रूप से तिल और खिचड़ी) ही श्रेष्ठ माना जाता है। साथ ही, नशा और शराब से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।

2. द्वार पर आए किसी को खाली हाथ न लौटाएं
यह दिन दान-पुण्य के लिए समर्पित है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन आपके घर के दरवाजे पर कोई भिखारी या जरूरतमंद आए, तो उसे अपनी श्रद्धा अनुसार कुछ न कुछ दान जरूर देना चाहिए। किसी को भी दुत्कार कर खाली हाथ भेजना आपके संचित पुण्यों को कम कर सकता है।

3. कड़वे शब्दों से बचें
पुराणों में लिखा है कि त्योहार के दिन वाणी में मधुरता होनी चाहिए। गुस्सा करना या किसी को अपशब्द बोलना शुभ नहीं माना जाता। अपनी बातों से किसी का दिल दुखाना इस पावन दिन के फल को नष्ट कर सकता है।

4. स्नान से पहले अन्न का सेवन न करें
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करने का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बिना स्नान किए भोजन ग्रहण करना दोषपूर्ण माना जाता है। पहले शुद्ध होकर पूजा-अर्चना करें, फिर ही कुछ खाएं।

5. पेड़-पौधों को नुकसान न पहुँचाएं
मकर संक्रांति प्रकृति की पूजा का पर्व है। इस दिन पेड़ों की कटाई या किसी भी पौधे को नुकसान पहुँचाना वर्जित बताया गया है। अगर संभव हो, तो इस दिन एक पौधा लगाकर आप अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए नेक काम कर सकते हैं।