छत्तीसगढ़ के जंगलों में फिर हुआ खूनी खेल, ठेकेदार का सिर काटकर नक्सलियों ने दी खौफनाक चेतावनी
News India Live, Digital Desk : हम अक्सर सुनते हैं कि छत्तीसगढ़ अब बदल रहा है, वहां नक्सलवाद (Naxalism) खत्म हो रहा है। लेकिन आज वहां से जो खबर आई है, उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि "लाल आतंक" अभी भी अपनी आखिरी सांसें गिनते हुए भी कितना खतरनाक हो सकता है। यह खबर किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि एक रोंगटे खड़े कर देने वाली हकीकत है।
एक ठेकेदार (Contractor), जो शायद वहां सड़क बनाकर लोगों की ज़िंदगी आसान करने की कोशिश कर रहा था, उसे नक्सलियों ने ऐसी मौत दी है जिसे सुनकर या पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी।
क्या हुआ है बीहड़ों में?
घटना छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित इलाके की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नक्सलियों ने एक निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार को निशाना बनाया। उनका तरीका इतना बर्बर और 'तालिबानी' था कि देखने वालों की भी हिम्मत जवाब दे गई।
खबर है कि नक्सलियों ने पहले ठेकेदार को पकड़ा, और फिर बेरहमी से उनका सिर धड़ से अलग (Beheaded) कर दिया। इतना ही नहीं, शव के पास हमेशा की तरह पर्चे फेंककर अपनी कायराना हरकत की जिम्मेदारी भी ली। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद साफ़ है—इलाके में दहशत (Terror) फैलाना ताकि कोई भी वहां विकास का काम करने की हिम्मत न जुटा पाए।
विकास से क्यों डरते हैं नक्सली?
यह पहली बार नहीं है जब किसी ठेकेदार या मजदूर को निशाना बनाया गया है। नक्सली नहीं चाहते कि जंगलों में पक्की सड़कें बनें या पुल बनें। उन्हें डर लगता है कि अगर सड़कें बन गईं, तो पुलिस और सुरक्षा बल आसानी से उनके ठिकानों तक पहुंच जाएंगे। इसलिए, वे उन निहत्थे लोगों को निशाना बनाते हैं जो वहां रोजगार और विकास लेकर जाते हैं।
एक परिवार उजड़ गया
ज़रा उस परिवार के बारे में सोचिये जिसने अपना बेटा, पति या पिता खो दिया। वो शख्स तो सिर्फ़ अपनी रोज़ी-रोटी कमाने और देश का काम करने वहां गया था। हत्या के बाद इलाके में सन्नाटा है। लोग डरे हुए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है, लेकिन जो जान चली गई, वो अब वापस नहीं आएगी।
प्रशासन के लिए चुनौती
यह घटना सरकार और सुरक्षा बलों के लिए भी एक खुली चुनौती है। एक तरफ दावा किया जाता है कि नक्सली अब सीमित दायरे में सिमट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं बता रही हैं कि वे अभी भी आम लोगों की जान ले सकते हैं।
इस खौफनाक घटना ने फिर एक सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर कब रुकेगा बस्तर की धरती पर यह खून का खेल? कब तक विकास की कीमत बेगुनाहों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी?
हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि मृतक की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को यह गहरा दुख सहने की शक्ति मिले।