BREAKING:
March 25 2026 11:09 am

ब्रजेश पाठक के घर जुटी बीजेपी की टोली, निगम और बोर्डों में तैनातियों पर लगी मुहर केशव और धर्मपाल की मौजूदगी ने बढ़ाया सियासी तापमान

Post

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम, बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियों का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर भाजपा के शीर्ष नेताओं की एक हाई-प्रोफाइल बैठक हुई, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस बैठक में दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि कार्यकर्ताओं के 'इंतजार की घड़ियां' अब खत्म होने वाली हैं।

बैठक का एजेंडा: कार्यकर्ताओं को 'उपहार' देने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, इस गोपनीय बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को संतुष्ट करना था, जिन्होंने पिछले चुनावों में पार्टी के लिए जी-जान से काम किया है।

निगम और बोर्डों में रिक्तियां: प्रदेश के दर्जनों निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।

2027 की तैयारी: इन नियुक्तियों को 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी चाहती है कि जमीनी स्तर के नेताओं को सरकारी ओहदों से नवाजकर उनमें नया जोश भरा जाए।

जातीय समीकरण: बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि नियुक्तियों में 'सोशल इंजीनियरिंग' का पूरा ख्याल रखा जाए, ताकि हर वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की 'जुगलबंदी'

पिछले कुछ समय से राज्य सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्रियों का एक साथ बैठना विपक्ष के लिए एक कड़ा संदेश है। ब्रजेश पाठक के आवास पर हुई इस मंत्रणा में उन नामों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नेतृत्व के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

पंकज चौधरी की मौजूदगी के क्या हैं मायने?

इस बैठक में केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का शामिल होना काफी अहम माना जा रहा है। पूर्वांचल की राजनीति में उनकी गहरी पैठ है और उनका शामिल होना यह दर्शाता है कि दिल्ली दरबार भी यूपी की इन नियुक्तियों पर करीब से नजर रख रहा है। खासकर पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को साधने के लिए पंकज चौधरी के सुझावों को प्राथमिकता दी जा रही है।