Bilaspur Train Accident : सिग्नल नहीं, ड्राइवर नहीं, बिलासपुर ट्रेन हादसे की असली वजह जानकर आपके होश उड़ जाएंगे
News India Live, Digital Desk: Bilaspur Train Accident : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए बड़े ट्रेन हादसे ने सबको हैरान कर दिया था. इस हादसे में अमरकंटक एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतर गए थे, जिसमें कई यात्री घायल हो गए थे. गनीमत यह रही कि ट्रेन की रफ्तार धीमी थी, वरना यह एक बहुत बड़ी और जानलेवा दुर्घटना बन सकती थी. हादसे के बाद हर किसी के मन में यही सवाल था कि आखिर यह हुआ कैसे? क्या सिग्नल में कोई खराबी थी या फिर लोको पायलट से कोई चूक हो गई?
अब इस मामले में रेलवे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है, और उसमें जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला और गंभीर है.
हादसे की वजह - पटरी में 'दरार'
जी हां, रेलवे की शुरुआती जांच के मुताबिक, इस भीषण हादसे की वजह कोई मानवीय या तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पटरी में आई एक बड़ी दरार थी. जांच टीम को घटनास्थल से टूटी हुई पटरी का एक टुकड़ा मिला है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेन जब इस टूटी हुई पटरी (फ्रैक्चर) के ऊपर से गुजरी, तो दबाव के कारण पटरी और ज्यादा टूट गई और एक के बाद एक 8 डिब्बे पटरी से उतरते चले गए.
यह खुलासा रेलवे की मेंटेनेंस और सेफ्टी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है. इसका सीधा मतलब है कि पटरियों की नियमित जांच में कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही हुई है.
बचाव में काम आई धीमी रफ्तार
इस पूरे मामले में एक ही बात गनीमत रही कि ट्रेन जब पटरी से उतरी, तब उसकी रफ्तार बहुत कम थी. दरअसल, ट्रेन उस समय एक 'कॉशन' (सावधानी) सिग्नल को पार कर रही थी, जिसके कारण लोको पायलट ने पहले ही ट्रेन की गति को 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक कम कर दिया था. अगर ट्रेन अपनी सामान्य रफ्तार में होती, तो यह हादसा जानलेवा हो सकता था और डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ सकते थे. लोको पायलट की इस सतर्कता ने सैकड़ों लोगों की जान बचा ली.
रेलवे पर उठे गंभीर सवाल
पटरी में फ्रैक्चर मिलना यह दर्शाता है कि:
- नियमित पेट्रोलिंग में चूक: क्या गैंगमैन और कीमैन द्वारा की जाने वाली पटरियों की नियमित पैदल निगरानी (पेट्रोलिंग) ठीक से नहीं हो रही थी?
- अल्ट्रासोनिक जांच में लापरवाही: क्या पटरियों की अल्ट्रासोनिक फॉल्ट डिटेक्शन (USFD) मशीन से होने वाली जांच में इस दरार को पकड़ा नहीं जा सका?
अब आगे क्या?
इस मामले में अब रेलवे सेफ्टी कमिश्नर द्वारा एक उच्च-स्तरीय जांच की जाएगी. इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पटरी में यह फ्रैक्चर कब और कैसे आया और इसे समय पर क्यों नहीं ठीक किया गया. अगर जांच में मेंटेनेंस टीम के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही पाई जाती है, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह हादसा रेलवे के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सुरक्षा और रखरखाव में की गई छोटी सी भी चूक कितने बड़े हादसे को न्योता दे सकती है.