Bihar Vidhan Sabha : लोकतंत्र की जननी का गौरव है बिहार, स्थापना दिवस पर बोले ओम बिरला बजट सत्र से पहले विपक्ष ने घेरा

Post

News India Live, Digital Desk : बिहार विधानसभा आज अपना स्थापना दिवस मना रही है। इस मौके पर पटना के सेंट्रल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम दिग्गज एक साथ नजर आए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मौजूदगी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिहार की धरती को दुनिया में लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाने वाली भूमि बताया।

1. ओम बिरला का संबोधन: 'सदन चर्चा के लिए है, शोर के लिए नहीं'

लोकसभा अध्यक्ष ने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना और समृद्ध है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

सदन की गरिमा: उन्होंने कहा कि सदन में असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन गतिरोध और शोर-शराबे से जनता का नुकसान होता है।

बिहार का नेतृत्व: उन्होंने याद दिलाया कि वैशाली से शुरू हुई लोकतांत्रिक परंपरा आज भी भारत के संसदीय तंत्र का आधार है।

तकनीक का उपयोग: उन्होंने बिहार विधानसभा के 'डिजिटलीकरण' के प्रयासों की सराहना की।

2. नीतीश और तेजस्वी एक मंच पर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच शिष्टाचार भेंट ने भी सुर्खियां बटोरीं। नीतीश कुमार ने स्थापना दिवस की बधाई देते हुए बिहार के विकास में सदन की भूमिका को सराहा। वहीं, तेजस्वी यादव ने राज्य की ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा के लिए सदन के समय के सही उपयोग की बात कही।

3. बजट सत्र की आहट और विपक्ष के तेवर

स्थापना दिवस के जश्न के बीच आगामी बजट सत्र (2026-27) की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विपक्ष (RJD और कांग्रेस) ने सरकार को घेरने के लिए रणनीति तैयार कर ली है:

भ्रष्टाचार और क्राइम: विपक्ष का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध का ग्राफ बढ़ा है।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी: पूर्णिया सांसद की गिरफ्तारी का मुद्दा भी सदन में गरमाने की पूरी संभावना है।

बेरोजगारी: तेजस्वी यादव ने संकेत दिया है कि वे युवाओं को रोजगार और संविदा कर्मियों के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे।

4. विधानसभा का ऐतिहासिक महत्व

7 फरवरी 1921 को बिहार और उड़ीसा प्रांतीय परिषद की पहली बैठक हुई थी। तब से लेकर आज तक, यह सदन कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह रहा है। आज का दिन उन लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करने का है जिन्होंने आधुनिक बिहार की नींव रखी।