झारखंड में बड़ा रैकेट अच्छी शिक्षा के नाम पर तस्करी? धर्म परिवर्तन के शक ने खड़ी की मुसीबत

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News India Live, Digital Desk : अक्सर हम और आप अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने देखते हैं। इसी सपने का फायदा कुछ दलाल उठाते हैं और गरीब परिवारों को अपनी बातों के जाल में फंसा लेते हैं। झारखंड के दुमका (Dumka) और संथाल परगना इलाके से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर आई है।

यहाँ अच्छी शिक्षा और फ्री हॉस्टल का लालच देकर 27 मासूम बच्चों को देश की सीमा पार, यानी नेपाल (Nepal) ले जाया गया। जब हकीकत सामने आई, तो न सिर्फ उन बच्चों के माता-पिता बल्कि पुलिस प्रशासन के भी होश उड़ गए।

स्कूल की जगह कहां पहुंचाया?

हैरानी की बात ये है कि दलालों ने गरीब आदिवासियों को भरोसा दिलाया था कि वे उनके बच्चों को बड़े शहरों के अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाएंगे। लेकिन रिपोर्ट्स बता रही हैं कि इन बच्चों को नेपाल के सुनसरी जिले और आसपास के इलाकों में ले जाकर मदरसों में रख दिया गया।

ब्रेनवॉश और धर्म परिवर्तन का डर?

मामला सिर्फ पढ़ाई का नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। बाल कल्याण समिति (CWC) और पुलिस को शक है कि शिक्षा की आड़ में इन बच्चों का धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कराने या उन्हें ब्रेनवॉश करने की साजिश हो सकती थी। सोचिए उन माँ-बाप पर क्या गुजर रही होगी जिन्होंने यह सोचकर बच्चों को भेजा था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर अफसर बनेगा, लेकिन वहां तो खेल ही कुछ और चल रहा था।

पुलिस हुई सख्त, नेपाल जाएगी टीम

जैसे ही यह खबर दुमका पुलिस और प्रशासन तक पहुंची, हड़कंप मच गया। दुमका के एसपी (SP) ने मामले को गंभीरता से लिया है। खबर है कि इन 27 बच्चों को रेस्क्यू (Rescue) करने के लिए झारखंड पुलिस की एक टीम जल्द ही नेपाल के लिए रवाना हो सकती है। इसके लिए गृह विभाग और विदेश मंत्रालय से भी संपर्क साधा जा रहा है।

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर बॉर्डर पर सुरक्षा होते हुए भी इतनी बड़ी तादाद में बच्चों को बिना कागजात के उस पार कैसे ले जाया गया?

मां-बाप के लिए सबक

यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ा सबक है। कोई अनजान व्यक्ति अगर आकर कहे कि वह आपके बच्चे को फ्री में पढ़ाएगा, तो एक बार नहीं, सौ बार सोचिए। कहीं 'अच्छी पढ़ाई' के नाम पर आपके जिगर के टुकड़े को आपसे दूर ले जाकर किसी दलदल में तो नहीं धकेला जा रहा?

पुलिस अभी जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही सभी बच्चे सुरक्षित अपने घर लौट आएंगे। लेकिन यह डर अभी लंबे समय तक झारखंड के लोगों को सालता रहेगा।